बड़ी राहत – वन अधिकार FRA दावों वाले उम्मीदवार नहीं होंगे अयोग्य, पंचायती राज विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण

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एप्पल न्यूज़, शिमला
Government of Himachal Pradesh के Panchayati Raj Department ने पंचायत चुनावों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि Forest Rights Act, 2006 के तहत दावे दाखिल करने वाले व्यक्तियों को केवल अतिक्रमण के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

यह निर्णय विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों और पारंपरिक वन निवासियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
विभाग द्वारा सभी उपायुक्तों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जिन व्यक्तियों ने वन अधिकार अधिनियम के तहत अपने दावे पहले ही प्रस्तुत कर दिए हैं और वे लंबित हैं, उन्हें पंचायत चुनाव लड़ने या पंचायत में पदाधिकारी बनने से नहीं रोका जा सकता।

यह स्पष्ट किया गया है कि ऐसे मामलों में केवल “अतिक्रमण” को आधार बनाकर अयोग्यता लागू करना उचित नहीं होगा।
यह स्पष्टीकरण Himachal Pradesh Panchayati Raj Act, 1994 की धारा 122(1)(c) के संदर्भ में जारी किया गया है, जिसमें अतिक्रमण के मामलों में अयोग्यता का प्रावधान है।

हालांकि, विभाग ने कानून विभाग की राय के आधार पर कहा है कि यदि किसी व्यक्ति का वन अधिकार दावा विचाराधीन है, तो उसे इस प्रावधान के तहत अयोग्य नहीं माना जाएगा।
पत्र में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि नामांकन पत्रों की जांच के दौरान संबंधित अधिकारी (ARO) उम्मीदवार से वन अधिकार दावा फॉर्म की प्रति तथा Forest Rights Committee द्वारा जारी रसीद या स्वीकृति प्रमाण मांग सकते हैं।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित उम्मीदवार ने वास्तव में Forest Rights Act के तहत दावा दायर किया है।


इस आदेश की प्रतिलिपि State Election Commission Himachal Pradesh को भी भेजी गई है, साथ ही सभी जिला पंचायत अधिकारियों (DPO) और खंड विकास अधिकारियों (BDO) को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।
इस निर्णय को पंचायत चुनावों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवारों को राहत मिलेगी जिनके वन अधिकार दावे अभी लंबित हैं।

इससे न केवल चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के अधिकारों की भी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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