लालसा-डंसा बनी BDC की “हॉट सीट”, चुनावी जंग ‘इंक्रोचमेंट केस’ से शुरू, दुश्मनी के कगार पर महज 7500 मानदेय के लिए

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एप्पल न्यूज़, रामपुर बुशहर
हॉट बीडीसी सीट वार्ड 07 लालसा-डंसा में चुनावी मुकाबला अब पूरी तरह रोचक होता जा रहा है। चुनावी रण की पहली परीक्षा न्यायिक प्रक्रिया के रूप में सामने आई, जहां लालसा से उम्मीदवार मुरारकांत द्वारा देश कुमार हड्डन के खिलाफ अतिक्रमण (Encroachment) को लेकर एआरओ/तहसीलदार, पंचायत चुनाव रामपुर के समक्ष एक लिखित शिकायत आपत्ति याचिका दायर की गई।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि संबंधित उम्मीदवार सरकारी भूमि पर अतिक्रमण मामले में नियमितीकरण के अधीन हैं, जिसके आधार पर उनकी उम्मीदवारी निरस्त किए जाने की मांग उठाई गई। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड की प्रतियां भी संलग्न की गई थीं।


मामले की गहन छानबीन और सुनवाई के बाद फैसला पूर्व प्रधान ग्राम पंचायत डंसा रहे वर्तमान प्रत्याशी देश कुमार हुडन के पक्ष में आया, जिसे चुनावी समीकरणों में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

इस फैसले के बाद मुरारकांत का पहला दाव ही उल्टा पड़ गया है। स्थानीय स्तर पर इस घटनाक्रम को चुनावी राजनीति की पहली “पटकनी” के रूप में देखा जा रहा है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि वार्ड 07 लालसा-डंसा की यह चुनावी लड़ाई आगे किस मोड़ की ओर बढ़ती है और जनता किस उम्मीदवार पर अपना भरोसा जताती है।

वोट की बजाय केस की राजनीति, 7500 रुपये के मानदेय के लिए बढ़ी तल्खी
वार्ड 07 लालसा-डंसा की बीडीसी सीट पर चुनावी मुकाबला अब केवल वोटों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी लड़ाई तक पहुंच चुका है।

चुनावी मैदान में बढ़त हासिल करने के लिए अतिक्रमण (इंक्रोचमेंट) का मामला उठाकर विरोधी को घेरने की कोशिश की गई, लेकिन फैसला उल्टा पड़ गया।
स्थानीय लोगों के बीच अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि महज करीब 7500 रुपये मासिक मानदेय वाली सीट के लिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता व्यक्तिगत दुश्मनी का रूप लेती जा रही है।


ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव विकास और जनसेवा का माध्यम होना चाहिए, न कि आपसी कटुता और व्यक्तिगत संघर्ष का कारण। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में चुनावी माहौल और अधिक गर्माता है या फिर उम्मीदवार जनसमर्थन और विकास के मुद्दों पर लौटते हैं।

इतना ही नहीं ग्राम पंचायत डँसा में उपप्रधान पद के एक और प्रत्याशी ने दो अन्य प्रत्याशियों के खिलाफ भी इसी तरह की इंक्रोचमेंट ki शिकायत देकर उनके पत्ते काट दिए हैं।

अब देखना होगा कि इस तरह की राजनीति ग्रामीण विकास के लिए कितना खतरनाक मोड लेगी। क्योंकि अब तक भी देखा गया है कि पंचायत चुनाव मे इस तरह की लडाई आपसी रिश्ते नाते और भाई चारे को योद्ने वाली ही साबित हुई है और क्षेत्र विकास मे रोड़ा बन जाती है।

प्रत्याशी देश कुमार हुडन ने बताया कि ये सब उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र था। सच्चाई की जीत हुई और उनके ऊपर लगाए सारे आरोप झूठे सिद्ध हुए। अब जनता भी सच्चाई जान चुकी है और विकास के लिए अपने मत का उपयोग करेंगे।

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