एप्पल न्यूज़, शिमला
शिमला में मोबिलाइजेशन फॉर एड्स सुरक्षा, जिला सामुदायिक संसाधन समूह और जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति की संयुक्त समीक्षा बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में एचआईवी/एड्स की रोकथाम, जागरूकता और उपचार से जुड़े प्रयासों की समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने कहा कि नशे के लिए एक ही सिरिंज का इस्तेमाल करने से एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के मामले बढ़ रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों और युवाओं की गतिविधियों पर नजर रखने तथा नशे की लत से जूझ रहे लोगों का सहयोग करने की अपील की।
जिला एड्स प्रोग्राम अधिकारी डॉ. तहसीन ने बताया कि जिले में एचआईवी संक्रमित लोगों का अनुमानित लक्ष्य 546 है, जिनमें से 441 लोगों की पहचान हो चुकी है, जबकि 105 की पहचान अभी शेष है। पिछले वित्तीय वर्ष में जिले में 119 नए एचआईवी पॉजिटिव मामले सामने आए थे, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 17 नए मामले दर्ज किए गए हैं। जिले में अब तक 729 एचआईवी परीक्षण किए जा चुके हैं।

इनमें 88 पुरूष, 30 महिलाएं और एक ट्रांसजेंडर है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 17 मामले अभी तक सामने आएं हैं । इनमें 12 पुरूष, 3 महिलाएं और 2 ट्रांसजेंडर है। जिला में 729 एचआईवी टेस्टिंग की गई है। इन टेस्ट में से केवल चार ही ट्रांसजेंडर आए। बैठक में बताया गया कि 95:95:95: लक्ष्य के अंतर्गत 95 प्रतिशत एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को अपनी संक्रमण स्थिति की जानकारी हो, उनमें से 95 प्रतिशत नियमित एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) प्राप्त करें तथा उपचार प्राप्त कर रहे 99 प्रतिशत लोगों में वायरस का स्तर नियंत्रित (Viral Suppression) रहे। इस लक्ष्य की प्राप्ति से एचआईवी संक्रमण की रोकथाम और एड्स उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति संभव है। जिला में 7 इंटीग्रेटड काउंसलिंग टेस्टिंग सैंटर स्थापित किए गए है।
बैठक में बताया गया कि जिले में आईजीएमसी, कमला नेहरू अस्पताल, ठियोग, रोहड़ू, रामपुर और सुन्नी सहित सात इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एवं टेस्टिंग सेंटर (ICTC) संचालित हैं, जहां एचआईवी की जांच और पुष्टि की सुविधा उपलब्ध है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने बताया कि आईजीएमसी शिमला का ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (OST) केंद्र चिट्टा, हेरोइन और स्मैक जैसे ओपिओइड नशे की लत से पीड़ित लोगों को निःशुल्क उपचार, परामर्श, दवा और नियमित फॉलो-अप की सुविधा प्रदान कर रहा है।
यह केंद्र इंजेक्शन से नशा करने की प्रवृत्ति कम कर एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों की रोकथाम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उपायुक्त ने कहा कि एचआईवी का समय पर पता चलने और नियमित उपचार से संक्रमित व्यक्ति सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी सकता है, इसलिए समय-समय पर जांच कराना और जागरूक रहना बेहद जरूरी है।







