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HPU में 2019 की शिक्षक नियुक्तियों की हो “न्यायिक जांच”, SFI ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन

8.6.26 SJVN CORP AD HINDI
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एप्पल न्यूज़, शिमला

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने वर्ष 2019 में विज्ञापन संख्या Rectt.-17/2019 (30 दिसंबर 2019) के तहत सहायक प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर हुई नियुक्तियों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग उठाई है।

एसएफआई के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव के माध्यम से कुलपति को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताएं तथा यूजीसी विनियम-2018 के संभावित उल्लंघन सामने आए हैं। संगठन ने इन मामलों की जांच हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित समिति से कराने की मांग की है।


एसएफआई का कहना है कि वह लंबे समय से विश्वविद्यालय में पारदर्शी, निष्पक्ष और विधिसम्मत नियुक्ति प्रक्रिया की मांग करता रहा है। संगठन ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों के अध्ययन के आधार पर कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपे, लेकिन अब तक किसी भी मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ज्ञापन में एसएफआई ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है, जिसमें विश्वविद्यालय की कुछ नियुक्तियों में असत्यापित प्रमाण-पत्रों, अनुभव प्रमाण-पत्रों और शोध प्रकाशनों के आधार पर चयन किए जाने संबंधी टिप्पणियां दर्ज होने का दावा किया गया है। संगठन का कहना है कि इससे पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
एसएफआई ने आरटीआई से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर कुल आठ मामलों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र निर्धारित अंतिम तिथि के बाद स्वीकार किए गए, जबकि कुछ मामलों में यूजीसी विनियम-2018 के अनुसार आवश्यक अनुभव एवं पात्रता पूरी नहीं होने के बावजूद चयन किए जाने के संकेत मिलते हैं।

संगठन ने इन सभी मामलों की निष्पक्ष न्यायिक जांच कर जिम्मेदारी तय करने और नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
विश्वविद्यालय इकाई सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि सरकार प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों का तबादला कर सकती है, लेकिन आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों को नहीं बदल सकती। उन्होंने कहा कि संगठन के पास उपलब्ध दस्तावेज तथ्यों पर आधारित हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं पर शीघ्र संज्ञान लेकर निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
एसएफआई ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आगामी दिनों में अपना आंदोलन और तेज करेगा।

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