एप्पल न्यूज़, शिमला
शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में देरी को लेकर हिमाचल प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के सरकार और जिला प्रशासन पर चुनाव टालने के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पलटवार किया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि अगर जयराम ठाकुर धरने पर बैठते हैं तो यह अच्छी बात है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब जिला परिषद चुनाव की तारीख तय हो चुकी थी, तब जयराम ठाकुर जिला परिषद सदस्यों को बैठक में भेजने के बजाय पंचकूला क्यों ले गए थे?

सीएम सुक्खू ने कहा कि शिमला के जिला उपायुक्त ने चुनाव की तारीख तय कर रखी थी, लेकिन उस समय जिला परिषद सदस्यों को बैठक में भेजने के बजाय उन्हें पंचकूला के होटल में ले जाया गया। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि “आखिर जयराम ठाकुर को ऐसा क्या डर है?”
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चुनाव की तारीख तय करने में उपायुक्त को कोई दिक्कत नहीं है। जिला परिषद के चुनाव होने ही हैं और इन्हें कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि जब तक जिला परिषद और बीडीसी सदस्य मतदान नहीं कर लेते, तब तक उन्हें लेकर अलग-अलग तरह की गतिविधियां चलती रहती हैं।
सुक्खू ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अभी कुछ सदस्य राजस्थान से आए हैं, इसलिए उन्हें थोड़ा और घुमाया जाए, दर्शन करवाए जाएं और उसके बाद चुनाव के लिए लाया जाए।
बीते शनिवार को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला जिला परिषद के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव में देरी को लेकर प्रदेश सरकार और शिमला के उपायुक्त पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि चुनाव परिणाम घोषित होने के करीब दो महीने बाद भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं करवाया गया है। जयराम ठाकुर ने मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने और जरूरत पड़ने पर धरना देने की चेतावनी भी दी थी।






