किन्नौर विशेष न्यायालय का फैसला, पुलिस पद और वर्दी का दुरुपयोग कर युवकों से रकम वसूलने का मामला
एप्पल न्यूज़, रामपुर बुशहर/ किन्नौर
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में वर्ष 2020 में सामने आए भ्रष्टाचार और वसूली के मामले में रामपुर बुशहर स्थित किन्नौर विशेष न्यायालय ने तत्कालीन पुलिस चौकी कटगांव के प्रभारी हेड कांस्टेबल रवि चोपड़ा को दोषी करार देते हुए चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर कुल 46 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मामला भावानगर थाना क्षेत्र का है।
24 अप्रैल 2020 को आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323, 504, 506 और 384 सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

शराब की दुकान के नुकसान से शुरू हुआ मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 अप्रैल 2020 की रात कुछ युवक काफनू स्थित शराब की दुकान पर पहुंचे थे। दुकान बंद होने के कारण युवकों ने शटर पर लात मारी, जिससे दुकान के शटर और बल्ब को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई। अगले दिन पुलिस ने युवकों को पूछताछ के लिए कटगांव पुलिस चौकी बुलाया। इसके बाद शराब की दुकान को हुए नुकसान के संबंध में समझौता कराने की प्रक्रिया शुरू हुई।
आरोप था कि तत्कालीन चौकी प्रभारी रवि चोपड़ा ने युवकों को डराया-धमकाया और उनके साथ मारपीट की। साथ ही, गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की धमकी देकर उनसे 60 हजार रुपये की मांग की। यह रकम शराब की दुकान को हुए नुकसान के बदले समझौते के नाम पर मांगे जाने का आरोप था।
39 गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों पर विचार
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 39 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों पर विचार किया। जांच में बैंक खातों में हुए लेन-देन, मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट और अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया गया।
रिकॉर्ड के अनुसार, 19 अप्रैल 2020 को आरोपी के बैंक खाते में 50 हजार रुपये जमा हुए थे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में अपना फैसला सुनाया।
पुलिस पद के दुरुपयोग को माना गंभीर अपराध
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने पुलिस पद और वर्दी का दुरुपयोग करते हुए पीड़ितों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और समझौते के नाम पर रकम ली। अदालत ने इस कृत्य को सार्वजनिक विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला गंभीर अपराध माना।
अदालत ने दोषी को चार साल के कठोर कारावास और कुल 46 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही, उसे सजा में राहत देने से भी इनकार कर दिया।




