एप्पल न्यूज़, आनी
आनी के ओलवा गाँव में कुलक्षेत्र महादेव के सानिध्य में मनाया जाने वाला प्रसिद्ध दो दिवसीय ओलवा दिवाली उत्सव इस वर्ष 09 और 10 नवंबर को बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस उत्सव में काव गीत, चूड़ी-बांड नृत्य और कुलक्षेत्र महादेव के सजे रथ की दिव्य शोभायात्रा मुख्य आकर्षण रहेगी।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार
ओलवा गाँव में दिवाली उत्सव प्रतिवर्ष बड़े पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है। इसमें महादेव की शोभायात्रा के साथ कुंडा-देरची, काव गीत, चूड़ी-बांड नृत्य, ठमरू नृत्य, गोवर्धन पूजा तथा सामूहिक नाटी का सुंदर आयोजन किया जाता है।ग्रामीणों के अनुसार दिवाली उत्सव के पहले दिन 09 नवंबर को कुंडा-देरची का आयोजन किया जाएगा।

सुबह 10 से 11 बजे के बीच देव आज्ञा अनुसार भनूक देवता के गूर 12 घर देऊकर सहित समस्त ब्राह्मण ग्रामीण अपनी पारंपरिक वेशभूषा धोती-टोपी में मंदिर के कुंड स्थल से महादेव के पुजारी द्वारा प्रज्वलित दीप से मशालें जलाकर ढोल-नगाड़ों की मंगलमय ध्वनि के साथ मंदिर प्रांगण तक पहुंचेंगे।
इसके पश्चात महादेव के पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर अग्निकुंड प्रज्वलित किया जाएगा, जो पूरी रात जलता रहेगा। उसके बाद पुरोहित द्वारा पारम्परिक काव गीत का वाचन किया जाएगा। इस अवसर पर तलूणा, ओरली, फरानाली, पोरली, थनोग और तदाशा के गढ़िये ठमरू नृत्य में भाग लेंगे, जो यहां की प्राचीन संस्कृति एवं परंपराओं का प्रतीक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिवाली उत्सव के उपलक्ष्य में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के बाद पूरी रात पारंपरिक नाटी का दौर चलता रहता है।
गाँव के बुजुर्ग मोहर लाल शर्मा ने बताया कि दूसरे दिन 10 नवंबर को दीपावली एवं गोवर्धन पूजा मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य-अग्नि पूजन और गोवर्धन पूजा में गाँव की सभी ब्राह्मण महिला एवं पुरुष अपनी पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर सूर्य देव एवं अग्नि देव की विधिवत पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद महादेव की शोभायात्रा अपने 18 बाण-निशान के साथ कोठी के पीछे से होकर शिव मंदिर तक निकलेगी।




