IMG_20261107_092748
previous arrow
next arrow

मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी एरियर मामले में हिमाचल की ऐतिहासिक जीत को वर्तमान सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम बताया


कहा, सरकार के प्रयासों से बीबीएमबी, किशाऊ बांध, वाइल्डफ्लावर हॉल और जेएसडब्ल्यू के मामलों में प्रदेश को मिली बड़ी सफलता
वर्ष 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध एवं आत्मनिर्भर राज्य बनाने का लक्ष्यः मुख्यमंत्री

एप्पल न्यूज़, शिमला

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का हिमाचल प्रदेश का बीबीएमबी एरियर मामले में सर्वोच्च न्यायालय में जीतने के पश्चात आज नई दिल्ली से शिमला पहुंचने पर उनके सरकारी आवास ओकओवर शिमला में लोगों ने वाद्ययंत्रों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, विधायक हरीश जनारथा एवं सुरेश कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र कुमार, उप-महापौर उमा कौशल और महाधिवक्ता अनूप रतन भी उपस्थित थे।
 इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपने अधिकारों की लड़ाई में एक और ऐतिहासिक जीत हासिल की है। उन्होंने बीबीएमबी के एरियर मामले में प्रदेश के पक्ष में आए फैसले को राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, मजबूत संकल्प और निरंतर कानूनी एवं राजनीतिक प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित इस मामले में प्रदेश को न्याय मिलना हिमाचल के आर्थिक हितों की रक्षा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि बीबीएमबी के एरियर मामले में निर्णय आने और सर्वोच्च न्यायालय से प्रदेश के पक्ष में फैसला आने के बावजूद लगभग 15 वर्षों तक लंबित रहा और कई अवसरों पर सरकार की ओर से आवश्यक जवाब एवं प्रतिउत्तर समय पर दाखिल नहीं किए गए।
श्री सुक्खू ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2022 में सत्ता में आते ही हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर मजबूती से प्रदेश का पक्ष रखा तथा किसी भी दबाव में आए बिना अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को कोई कमजोर नहीं कर सका।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीबीएमबी मामले में मिली सफलता की नींव किशाऊ बांध परियोजना से संबंधित समझौते के दौरान ही रख दी गई थी। उन्होंने कहा हिमाचल सरकार ने संबंधित पक्षों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि हिमाचल प्रदेश किशाऊ बांध परियोजना पर आगे तभी बढ़ेगा, जब हरियाणा सरकार बीबीएमबी एरियर से जुड़े मामले में प्रदेश के पक्ष में आवश्यक हलफनामा सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल करेगी। उन्होंने कहा कि यह शर्त प्रदेश के हितों को सर्वोपरि रखते हुए रखी गई थी और केंद्र सरकार से भी इस दिशा में सहयोग की अपेक्षा की गई थी।
श्री सुक्खू ने कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और संबंधित अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में भी उन्होंने लगातार बीबीएमबी एरियर का मुद्दा उठाया कि किशाऊ बांध परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले बीबीएमबी से जुड़े हिमाचल के अधिकारों का समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा और केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल करना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रहा। पंजाब सरकार ने शुरुआत में हलफनामा दाखिल करने को लेकर आनाकानी की, लेकिन प्रदेश सरकार अपने रुख पर अडिग रही। उन्होंने कहा कि किशाऊ बांध समझौते के माध्यम से हिमाचल ने अपने हितों की रक्षा करते हुए एक दूरदर्शी राजनीतिक और कानूनी रणनीति अपनाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना के मामले में हिमाचल ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते पर सहमति दी। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश सरकार ने दृढ़ता नहीं दिखाई होती तो हिमाचल को भी ऐसी शर्तों पर समझौता करना पड़ सकता था, जिसमें हिमाचल प्रदेश के हितों की अनदेखी होती। उन्होंने कहा कि हिमाचल के जल और ऊर्जा संसाधनों पर प्रदेश का अधिकार सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बीबीएमबी से मिलने वाली बिजली का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए सरकार बेहतर विकल्पों पर काम कर रही है। यदि बिजली छः रुपये प्रति यूनिट की दर से बेची जाती है तो प्रदेश को लगभग 500 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं, लेकिन सरकार का प्रयास है कि बिजली का ऐसा समझौता किया जाए जिससे प्रदेश को अधिकतम आर्थिक लाभ मिले और यह राशि बढ़कर लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सके।
श्री सुक्खू ने कहा कि बीबीएमबी एरियर से आगामी 20 वर्षों में प्रदेश को लगभग 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है तथा 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। इसी प्रकार किशाऊ बांध परियोजना से आगामी पांच वर्षों में लगभग 12,000 करोड़ रुपये की आय की संभावना है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने केवल बीबीएमबी के मामले में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के हितों से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण मामलों में भी सफलता हासिल की है। वाइल्डफ्लावर हॉल का मामला पिछले 23 वर्षों से लंबित था और सरकार के प्रयासों से अब प्रदेश के खजाने में राजस्व प्राप्त हो रहा है। इसी प्रकार जेएसडब्ल्यू के कड़छम-वांगतु जल विद्युत परियोजना में बिजली रॉयल्टी 12 प्रतिशत से 18 प्रतिशत बढ़ाने का मामला प्रभावी ढंग से उठाया जिससे सर्वोच्च न्यायालय में प्रदेश सरकार ने जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से अब लगभग 150 करोड़ रुपये वार्षिक प्रदेश के खजाने में पहुंचना सुनिश्चित हुआ है।
श्री सुक्खू ने कहा कि ये सभी उपलब्धियां दर्शाती हैं कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता से कठिन से कठिन चुनौतियों का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्त्वपूर्ण है और सरकार की आलोचना करना उसका अधिकार है, लेकिन जब बात प्रदेश के अधिकारों और आर्थिक हितों की हो तो सभी राजनीतिक दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हिमाचल के साथ खड़ा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने वर्तमान कांग्रेस सरकार को पांच वर्ष के लिए राज्य की संपदा और संसाधनों का संरक्षक बनाकर जिम्मेदारी सौंपी है। सरकार इस दायित्व को पूरी निष्ठा से निभा रही है। आपदा के कठिन दौर में भी सरकार ने चुनौतियों का डटकर सामना किया और प्रदेश के पुनर्निर्माण के लिए प्रभावी कदम उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन प्रयासों की सराहना विश्व बैंक और नीति आयोग सहित विभिन्न संस्थाओं ने भी की है।
श्री सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2032 तक हिमाचल प्रदेश को देश का सबसे समृद्ध और आर्थिक रूप से सशक्त राज्य बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस दिशा में स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है और प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की जनता ने वर्तमान सरकार पर जो विश्वास जताया है, सरकार उस पर खरा उतरने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकारों की रक्षा, संसाधनों का उचित उपयोग और आर्थिक मजबूती सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं। हिमाचल प्रदेश अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहेगा और विकास एवं आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ेगा।
श्री सुक्खू ने दीपावली के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि धनतेरस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के लिए भी खुशियों और आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

Share from A4appleNews:

You May Like

Breaking News