उद्योग निदेशालय ने शिमला में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की दूसरी वर्षगांठ मनाई

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उद्योग निदेशालय, हिमाचल प्रदेश ने आज अपने शिमला मुख्यालय में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की दूसरी वर्षगांठ मनाई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि आर.डी. नजीम (IAS), अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग, हिमाचल प्रदेश सरकार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में डॉ. यूनुस (IAS), निदेशक उद्योग, डॉ. हरीश गज्जू (HAS), अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन), दीपिका खत्री और अनिल ठाकुर, संयुक्त निदेशक, अंबिका सूद, उपनिदेशक तथा जिला उद्योग केंद्रों के महाप्रबंधक संजय कंवर सहित MSME और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े प्रमुख हितधारक भी शामिल हुए।

योजना के लाभार्थियों ने कार्यक्रम में शारीरिक रूप से तथा प्रदेश के सभी बारह जिलों से वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। जिला उद्योग केंद्रों के महाप्रबंधकों ने अपने-अपने कार्यालयों से लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सुनिश्चित किया कि सभी जिलों से व्यापक भागीदारी हो सके और कार्यक्रम समावेशी बने।

स्वागत भाषण में निदेशक उद्योग, डॉ. यूनुस (IAS) ने योजना के सुचारू क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अब तक 19,000 से अधिक आवेदन स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 12,000 कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया है।

उन्होंने विभाग की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि कारीगरों को निरंतर सहयोग और कौशल विकास के अवसर मिलते रहेंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ आर.डी. नजीम (IAS), अपर मुख्य सचिव, उद्योग ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा डॉक्यूमेंट्री के विमोचन से किया। इस डॉक्यूमेंट्री में परंपरागत कारीगरों की बदलती हुई जीवन कहानियों को प्रस्तुत किया गया।

नजीम ने विभिन्न जिलों से आए लाभार्थियों से सीधे संवाद कर योजना से उनके जीवन और आजीविका में आए सकारात्मक बदलावों के अनुभव भी सुने।

इस अवसर पर कारीगरों और लाभार्थियों को सम्मानित किया गया। नजीम (IAS) ने उनके बढ़ते आत्मविश्वास, बाज़ार को लेकर तैयारी और हिमाचली शिल्पकला को देशभर में पहुँचाने के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने भारत सरकार और डॉ. राजनीश (IAS), अपर सचिव एवं विकास आयुक्त, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय का धन्यवाद किया। साथ ही उन्होंने डॉ. यूनुस (IAS), निदेशक उद्योग, तिलक राज शर्मा, अतिरिक्त निदेशक उद्योग और पूरी प्रधानमंत्री विश्वकर्मा टीम के प्रयासों की भी सराहना की।

योजना की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर तिलक राज शर्मा, अतिरिक्त निदेशक उद्योग ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री का विमोचन कारीगरों के अमूल्य योगदान और योजना की भूमिका को उजागर करता है, जिसने उनकी आजीविका को सुदृढ़ किया है और सतत विकास को बढ़ावा दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि निदेशालय परंपरागत कौशल को बढ़ावा देने, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और विकसित भारत के दृष्टिकोण को समावेशी एवं सतत विकास के माध्यम से साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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