एप्पल न्यूज़, शिमला/नई दिल्ली
हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट के बीच सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के एक और फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
दिल्ली, चंडीगढ़ और शिमला स्थित हिमाचल भवन, हिमाचल सदन और सर्किट हाउस के कमरों के किराये में की गई बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष और आम जनता ने कड़ी आपत्ति जताई है।
Government of Himachal Pradesh के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा 18 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, चयनित कमरों का किराया बढ़ाकर 4000 रुपये (टैक्स सहित) कर दिया गया है।

यह नई दरें हिमाचल भवन नई दिल्ली, हिमाचल सदन नई दिल्ली, हिमाचल भवन चंडीगढ़ और विलीज़ पार्क सर्किट हाउस, शिमला पर लागू होंगी। आदेश के अनुसार यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
हालांकि, इस फैसले के सामने आते ही विवाद शुरू हो गया। आलोचकों का कहना है कि किराये में यह भारी बढ़ोतरी आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली है।
खासकर उन लोगों के लिए, जो इलाज, सरकारी कार्य या अन्य जरूरी कारणों से राजधानी और अन्य शहरों में ठहरने के लिए इन भवनों पर निर्भर रहते हैं।

विवाद का एक बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि जहां आम उपयोग के कमरों का किराया बढ़ाया गया है, वहीं वीआईपी श्रेणी के कमरों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं की गई।
इससे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष ने इसे “आम आदमी पर बोझ और खास लोगों को राहत” की नीति करार दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “व्यवस्था परिवर्तन” के वादे के साथ सत्ता में आई सरकार के लिए ऐसे फैसले छवि पर असर डाल सकते हैं। इससे पहले भी कई मुद्दों पर सरकार को विरोध के बाद अपने निर्णयों में बदलाव करना पड़ा है, जिससे “यू-टर्न सरकार” जैसे आरोप भी लगते रहे हैं।
फिलहाल, इस फैसले को लेकर प्रदेश में बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है—क्या वह अपने निर्णय पर कायम रहती है या बढ़ते दबाव के बीच इसमें संशोधन करती है।







