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CDSCO की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, हिमाचल में बनी 49 दवाएं मानकों पर “फेल”, बद्दी से पांवटा साहिब तक उद्योगों पर सवाल

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एप्पल न्यूज़, शिमला
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की नवंबर 2025 की मासिक ड्रग अलर्ट रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर की गई गुणवत्ता जांच में देशभर की कुल 205 दवाएं नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) पाई गई हैं, जिनमें से 49 दवाएं हिमाचल प्रदेश में निर्मित पाई गईं। यह संख्या देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार ये दवाएं बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, सोलन, कालाअंब, पांवटा साहिब और ऊना जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित फार्मास्यूटिकल इकाइयों में बनाई गई थीं। जांच के दौरान हिमाचल की 37 दवाएं राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में और 12 दवाएं CDSCO की केंद्रीय प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।

ड्रग अलर्ट में यह भी सामने आया कि कालाअंब स्थित एक कंपनी की सबसे अधिक पांच दवाएं जांच में फेल पाई गई हैं।
गुणवत्ता में फेल हुई दवाओं में टाइफाइड, फेफड़ों के संक्रमण, मूत्र मार्ग संक्रमण, पेट के संक्रमण, साथ ही खांसी, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, एलर्जी और पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों की दवाएं शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की दवाओं का सब-स्टैंडर्ड होना मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है और इलाज की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर 2025 में देशभर में NSQ पाई गई 205 दवाओं में से 64 दवाएं केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं और 141 दवाएं राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं की जांच में फेल हुईं। इसके अलावा उत्तर क्षेत्र के गाजियाबाद से दो दवाओं को नकली भी घोषित किया गया है।
नोटिस जारी, रिकॉल के आदेश
राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि जिन कंपनियों की दवाएं गुणवत्ता जांच में असफल पाई गई हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। साथ ही संबंधित दवाओं के पूरे बैच को बाजार से तुरंत रिकॉल करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा दवा निरीक्षकों को इन फार्मास्यूटिकल इकाइयों का रिस्क बेस्ड निरीक्षण करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
राज्यवार स्थिति
राष्ट्रीय ड्रग अलर्ट के अनुसार NSQ दवाओं की संख्या में हिमाचल प्रदेश (49) पहले स्थान पर है। इसके बाद उत्तराखंड (39), गुजरात (27), मध्य प्रदेश (19), तमिलनाडु (12), हरियाणा (9), तेलंगाना और चेन्नई (7-7), सिक्किम व पुडुचेरी (5-5), महाराष्ट्र (4), पंजाब और पश्चिम बंगाल (3-3) शामिल हैं। वहीं केरल से केवल एक दवा गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर सकी है।
गंभीर चिंता का विषय
देश का प्रमुख फार्मा हब माने जाने वाले हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में दवाओं का गुणवत्ता जांच में फेल होना न केवल उद्योग की साख, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दवा निर्माण और निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों तक सुरक्षित और प्रभावी दवाएं ही पहुंच सकें।

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