एप्पल न्यूज़, शिमला
भाषा एवं संस्कृति विभाग जिला शिमला द्वारा गेयटी थियेटर शिमला के सम्मेलन कक्ष में नव वर्ष की पूर्व संध्या पर जिला स्तरीय बहुभाषी कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया । आयोजन के आरंभ में मुख्य अतिथि एस आर हरनोट द्वारा दीप प्रज्वल कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मंच का संचालन त्रिलोक सूर्यवंशी द्वारा किया गया।
इस आयोजन में लगभग शिमला के 20 से अधिक कवियों ने भाग लिया जिसमें शिमला जिले के ओपी शर्मा की कविता “मोबाइल ने दिए जीवन के कई रंग”, नारायण सिंह जी की कविता “तंग है” पूजा सूद की कविता “एक कोशिश”, दिनेश गजटा की कविता “जंगल जल रहे हैं” वीरेंद्र वीर की कविता “गांठें”, उमा ठाकुर की कविता “चिट्ठा छोड़ो जिंदगी अपनाए” प्रोमिला शर्मा “संवारो सृष्टि” सत्या वसुंधरा की कविता “वापसी की उम्मीद”, भारती कुठियाला की कविता “बतियाती स्त्रियां”, राधा सिंह, “हे कवि”, गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय की कविता “शिमला में जाड़े की धूप”, स्नेह नेगी की कविता “खो जाती हूं”, जगदीश कश्यप की कविता “अच्छा लगता है”, सरला कुमारी की कविता “पहाड़”, हरदेव धीमान की कविता “मजदूर”, त्रिलोक सूर्यवंशी की कविता “मेरा मंडी” एवं एस आर हरनोट की कविता “चिड़िया बजारिन”, कविताएं सुनाई।

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि उप निदेशक कुसुम संघाईक रही तथा अध्यक्षता श्री मस्तराम शर्मा ने की उन्होंने कहा की कविता में कवित्व का होना बहुत कठिन है।
कवि का हृदय एक दर्पण होता है जो उन्हें दिखता है उसे ही लिखता है । हमें अपने एहम को पहले जगाना होता है तभी हम दूसरों को जान सकते हैं
मुख्य अतिथि एस आर हरनोट ने कहा कि सभी कवियों ने अपनी कविताओं के द्वारा पर्यावरण नशे के प्रति अपनी चिंता जताई है मोबाइल को अगर सकारात्मक दृष्टि से प्रयोग करते हैं तो पूरे विश्व से जुड़ते हैं.

उन्होंने कहा कि स्कूलों मे बच्चों को नशे से दूर रखने के बारे में कार्यक्रम करवाए जाए। इस कार्यक्रम में विभाग से सेवानिवृत उप निदेशक अलका कैथला भी उपस्थित रहे और गेयटी के प्रबंधक सहित समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे।
अंत में जिला भाषा अधिकारी सरोजना नरवाल ने सभी साहित्यकारों तथा मीडिया बंधुओं का कार्यक्रम के सफल आयोजन पर धन्यवाद किया।







