एप्पल न्यूज़, शिमला
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने शिमला मे प्रेस वार्ता कर कहा कि विकसित भारत G राम G योजना ग्रामीण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण योजना है जिसका सृजन आज के परिवेश को देखते ही किया गया है।
इससे पूर्व भी ग्रामीण क्षेत्रों मे रोजगार को लेकर विभिन्न योजनाएं बनाई गई थी। मनरेगा 2005 में बनाया गया था। ये योजनाएं कांग्रेस सरकारों ने बनाई थी।
उन्होंने कहा कि मनरेगा को आज की आवश्यकता के अनुसार परिवर्तित किया गया।

नाम बदलने को लेकर राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने भी हर नई योजना के साथ योजना का नाम बदला है। जब भी नई योजना आई नया नाम आया तो इसमें कुछ गलत नही है।
नई योजना के सृजन की आवश्यकता और अंतर
मनरेगा मे 100 दिन रोजगार दिया लेकिन विकास के साथ नहीं जोड़ा गया था जबकि जीराम जी विकास के साथ जोड़ कर पीएम गतिशक्ति के साथ जोड़ा गया।
मनरेगा मे 100 दिन रोजगार की बात की लेकिन 54 दिन से ज्यादा रोजगार नहीं मिला जबकि रामजी में 125 दिन रोजगार दिया गया है।
लेबर और मेटीरियल कंपोनेंट में केंद्र ने क्लीयर कर दिया कि हिमाचल के मामले में 90:10 रेशो मे दिया जायेगा।
अनेक राज्यों मे पिल्फ्रिज रही। मनरेगा मे 26 एक्टिविटि ka समावेश था अब चार फ्रेमवर्क मे डाला गया। ग्रामीण इंफ्रा, जल संरक्षण, पर्यावरण और।
प्रशासनिक व्यय को 6 से 9 प्रतिशत किया गया है।
मनरेगा में रोजगार न मिला तो जुर्माना मिलेगा लेकिन अब टाइम बॉउंड वेज पेमेंट मिलेगी।
2005 में मनरेगा योजना मनमोहन सिंह के नेतृत्व मे बनी। कांग्रेस सरकारों ने 2006 से 2014 तक 2,13,220 करोड़ रुपया मनरेगा मे व्यय किया गया। NDA सरकार ने 2014 से 2025 तक 8,53,810 करोड़ व्यय किया।
कुल सृजित दिवस 2014 तक 1660 लाख मेन डे जबकि मोदी सरकार मे 3210 लाख मेन डे सृजित की गए।
153 लाख कार्य पूरे किये जबकि मोदी सरकार में 862 लाख कार्य पूरे किए।
हिमाचल प्रदेश में तत्कालीन सरकारों में 2005 से 2014 तक 16.52 लाख मेन डे जबकि 2014 के बाद 2025 तक 32.60 मेन डे सृजित किए गए जो दोगुने हैं।
डॉ बिंदल ने कहा कि जी राम जी विकासोन्मुखी योजना है राजनीति से प्रेरित नहीं।







