एप्पल न्यूज़, शिमला
केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के लिए दिए जाने वाले राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को समाप्त किए जाने के विरोध में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिली है।
लोकभवन की ओर से इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए सरकार को बजट सत्र बुलाने का सुझाव दिया गया है।
इस सिलसिले में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया शुक्रवार सुबह स्वयं लोकभवन पहुंचे और राज्यपाल से विशेष सत्र के प्रस्ताव पर चर्चा की।
लोकभवन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय बजट सत्र का है और इस मुद्दे पर बजट सत्र के दौरान भी प्रस्ताव लाकर चर्चा और पारित किया जा सकता है। ऐसे में सरकार को विशेष सत्र के बजाय बजट सत्र बुलाने पर विचार करना चाहिए।
करीब आधे घंटे तक चली इस बातचीत के दौरान सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि आरडीजी समाप्त किए जाने से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

सरकार ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित किया जाए और केंद्र सरकार से इस निर्णय को वापस लेने का आग्रह किया जाए।
हालांकि, लोकभवन ने यह स्पष्ट किया कि बजट सत्र में भी इस मुद्दे पर चर्चा और प्रस्ताव पारित किया जा सकता है, इसलिए विशेष सत्र की आवश्यकता नहीं है।
विशेष सत्र को मंजूरी न मिलने से सरकार और राज्यपाल के बीच खिंचाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, हालांकि सरकार की ओर से इस विषय पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
हिमाचल के हितों के लिए बुलाया जा रहा विशेष सत्र : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विशेष सत्र को लेकर कहा कि यह विधानसभा सत्र पूरी तरह हिमाचल प्रदेश की जनता के हितों को ध्यान में रखकर बुलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि केंद्र सरकार ने हिमाचल को क्या दिया और क्या छीना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि करों में हिस्सेदारी हर साल बढ़ती है, लेकिन आरडीजी के रूप में मिलने वाली विशेष ग्रांट 72 साल बाद बंद कर दी गई है, जो बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने भाजपा विधायकों से अपील की कि वे विशेष सत्र में सहयोग करें और अपनी बात सदन में रखें।
सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आरोप लगाया कि भाजपा सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे पर भ्रम फैला रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सत्र राज्य की आर्थिक स्थिति और आरडीजी ग्रांट समाप्त किए जाने के खिलाफ आवाज उठाने के लिए बुलाया जा रहा है।







