एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश में उत्पन्न एक गंभीर प्रशासनिक गतिरोध की ओर तत्काल ध्यान आकर्षित करते हुए भारत की राष्ट्रपति को एक औपचारिक याचिका सौंपी गई है। याचिका में राज्य के ‘मुख्य सूचना आयुक्त’ का पद पिछले एक साल से खाली पड़े रहने का मुद्दा उठाया गया है।
राष्ट्रपति भवन को भेजे गए अपने ज्ञापन में नागरिक कैप्टन अतुल शर्मा ने हिमाचल प्रदेश राज्य सूचना आयोग (HPSIC) में एक साल से पड़ी इस रिक्ति को “संवैधानिक कर्तव्य से परे एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही” करार दिया है, जिसने राज्य के पूरे पारदर्शिता तंत्र को नेतृत्वहीन बना दिया है।

याचिका के अनुसार, शिमला स्थित इस शीर्ष संस्था में जुलाई 2025 से कोई मुख्य सूचना आयुक्त तैनात नहीं है। इसके चलते राज्य भर में द्वितीय अपीलों की सुनवाई पूरी तरह ठप हो गई है, नागरिकों के आवेदनों का निवारण रुक गया है और लंबित आरटीआई (RTI) मामलों का भारी अंबार लग गया है।
याचिका में रेखांकित किया गया है कि सूचना का अधिकार, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक अभिन्न अंग है।
आयोग को पूरे 365 दिनों तक नेतृत्वहीन रखना, सरकारी जवाबदेही तय करने के लिए बनाई गई वैधानिक संस्था को ध्वस्त करने जैसा है।
ज्ञापन में राष्ट्रपति से संवैधानिक नैतिकता की संरक्षक के रूप में हस्तक्षेप करने की मांग की गई है, ताकि राज्य सरकार को अपने वैधानिक दायित्व का पालन करने और अविलंब मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति करने का निर्देश दिया जा सके।






