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हिमाचल बना डिजिटल गवर्नेंस का “मॉडल राज्य”, e-Governance में नई मिसालें कायम- बुटेल

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एप्पल न्यूज़, शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार के डिजिटल टेक्नोलॉजी एवं गवर्नेंस विभाग (DDT&G) ने राज्य में पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को सशक्त बनाने के लिए कई फ्लैगशिप डिजिटल पहलें लागू की हैं। इन पहलों के जरिए हिमाचल ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है।

  1. मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन (1100)
    राज्य की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1100 नागरिकों की शिकायतों और सुझावों के निवारण का केंद्रीकृत मंच बन चुकी है। हेल्पलाइन ने 71% संतोषजनक निस्तारण दर हासिल की है, जो देश में सर्वाधिक बताई जा रही है।
    यह सेवा प्रतिदिन सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक संचालित होती है। जल शक्ति, बिजली, राजस्व, स्वास्थ्य, पुलिस, कृषि, एचआरटीसी सहित दस विभागों की 83% शिकायतें इसी प्लेटफॉर्म पर दर्ज होती हैं।
    व्हाट्सएप चैटबॉट (9418601100) के माध्यम से नागरिक शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं। अब इसमें जेनरेटिव एआई और एनएलपी तकनीक भी जोड़ी जा रही है, जिससे जवाब और तेज व सटीक होंगे।
  1. आधार में रिकॉर्ड उपलब्धि
    राज्य में 79.69 लाख से अधिक आधार कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जो अनुमानित आबादी का 114.34% है।
    0–5 आयु वर्ग में आधार नामांकन के मामले में हिमाचल देश में प्रथम स्थान पर है।
    सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में फेस ऑथेंटिकेशन लागू करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बना है।
  2. ‘हिम परिवार’ – एक राज्य, एक डेटा
    हिम परिवार (स्टेट सोशल रजिस्ट्री) के तहत राज्य के सभी नागरिकों का एकीकृत एवं सत्यापित डाटाबेस तैयार किया गया है।
    शहरी रजिस्टर: 2,11,946 परिवार
    ग्रामीण रजिस्टर: 19,59,300 परिवार
    इससे सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में मृत एवं अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर राज्य को लगभग ₹5 करोड़ प्रतिमाह की बचत हो रही है।
  3. ‘हिम एक्सेस’ – यूनिफाइड लॉगिन प्लेटफॉर्म
    सिंगल साइन-ऑन (SSO) सुविधा के जरिए नागरिक एक ही यूज़रनेम और पासवर्ड से विभिन्न विभागीय सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
    यह प्लेटफॉर्म डिजिलॉकर और शिक्षा प्रोफाइल से जुड़ा है तथा 8 लाख से अधिक उपयोगकर्ता इससे जुड़े हैं।
  4. हिम सेवा पोर्टल (e-District)
    हिम सेवा पोर्टल पर 510 ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें वित्त वर्ष के दौरान 233 नई सेवाएं जोड़ी गईं।
    एआई आधारित डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रणाली आवेदन प्रक्रिया में त्रुटियों को पहले ही चिन्हित कर देती है, जिससे अस्वीकृति कम हुई है।
    राज्य में 7,300 से अधिक लोक मित्र केंद्र ग्रामीण स्तर पर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
  5. हिमउपस्थिति – स्मार्ट अटेंडेंस सिस्टम
    आधार सक्षम बायोमेट्रिक और जियो-फेंसिंग तकनीक से लैस यह प्रणाली प्रॉक्सी उपस्थिति पर रोक लगाती है। इसमें अवकाश प्रबंधन, फील्ड विजिट और मल्टी-शिफ्ट मॉड्यूल शामिल हैं।
  6. इंफ्रास्ट्रक्चर एवं कनेक्टिविटी
    राज्य डेटा सेंटर (SDC) की क्षमता बढ़ाकर 1,024 टीबी कर दी गई है।
    सभी सरकारी विभागों को मुफ्त होस्टिंग और सुरक्षा ऑडिट सुविधा दी जा रही है।
    HIMSWAN नेटवर्क 2,500 से अधिक सरकारी कार्यालयों को जोड़ता है, जिससे कुछ बैंडविड्थ श्रेणियों में 65.39% तक लागत में कमी आई है।
  7. उभरती तकनीकें
    ब्लॉकचेन तकनीक से भूमि रिकॉर्ड को सुरक्षित और अपरिवर्तनीय बनाया जा रहा है।
    शिमला में एआई डेटा सेंटर और एडवांस्ड एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।
  8. आईटी निवेश को बढ़ावा
    कांगड़ा और महली (शिमला) में STPI सेंटर स्थापित किए गए हैं।
    वाकनाघाट (सोलन) में 343 बीघा क्षेत्र में अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जा रहा है।
    नई भूमि पट्टा नीति के तहत 40 वर्ष की लीज और सर्किल रेट के 10% पर वार्षिक किराया निर्धारित किया गया है।
  9. राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
    गवर्नेंस नाउ अवॉर्ड (2026) – हिम परिवार परियोजना
    पीपुल फर्स्ट इंटीग्रेशन अवॉर्ड (2025) – डिजिलॉकर एकीकरण
    आधार एक्सीलेंस अवॉर्ड (2025) – 0–5 आयु वर्ग में प्रथम स्थान
    PDS में फेस ऑथेंटिकेशन के लिए नवाचार सम्मान
  10. डिजिटल परिवर्तन की दिशा में हिमाचल प्रदेश ने जो कदम उठाए हैं, वे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ा रहे हैं, बल्कि नागरिकों के जीवन को सरल और पारदर्शी बना रहे हैं। राज्य की ये पहलें अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल साबित हो रही

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