‘विज्ञानमय भारत-विकसित भारत’ विकसित भारत के निर्माण की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता: राज्यपाल
एप्पल न्यूज़, हमीरपुर
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और समाज की आवश्यकताओं के बीच समन्वय मजबूत करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की नींव वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान की संस्कृति, नवाचार और वास्तविक जीवन की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर आधारित होनी चाहिए।
राज्यपाल ने यह बात राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), हमीरपुर में आयोजित शिक्षा महाकुंभ अभियान के छठे संस्करण को संबोधित करते हुए कही। इस वर्ष अभियान का विषय ‘विज्ञानमय भारत-विकसित भारत’ है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), जैव प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसी उभरती तकनीकें तेजी से बदलाव ला रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समग्र, बहुविषयक और कौशल आधारित शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, संवाद कौशल और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से तकनीक का केवल उपभोक्ता बनने के बजाय नई तकनीकों के सृजनकर्ता और नवाचारकर्ता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सवाल पूछने, प्रयोग करने, असफलताओं से सीखने और व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

समाज की समस्याओं के समाधान में उपयोगी हो वैज्ञानिक अनुसंधान
अनुसंधान और तकनीकी विकास के सामाजिक प्रभाव पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि वैज्ञानिक खोजों का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। इससे किसानों को लाभ मिलने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को सहायता तथा जल और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा मिलना चाहिए। इसके अलावा आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करने और पर्वतीय क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने में भी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए।
उन्होंने स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोगी, किफायती और टिकाऊ तकनीकों के विकास पर बल दिया। कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य केवल नई खोज करना ही नहीं, बल्कि उन खोजों को आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उपयोग में लाना भी होना चाहिए।
शिक्षण संस्थानों, उद्योगों और समाज के बीच समन्वय जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि नए विचारों को व्यावहारिक समाधानों में बदलने के लिए शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप, उद्योगों और समाज को मिलकर काम करना होगा। तकनीकी प्रगति को नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्वों से निर्देशित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच, कौशल और चरित्र का विकास करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षकों को विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच और अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग प्रकृति के साथ बेहतर संतुलन स्थापित करने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने इस महत्वपूर्ण पहल को आगे बढ़ाने के लिए आयोजकों और सहयोगी संस्थानों को बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा महाकुंभ अभियान-6.0 ज्ञान से नवाचार, नवाचार से समाधान और समाधान से राष्ट्र निर्माण की दिशा में सार्थक योगदान देगा
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. एच. एम. सूर्यवंशी, आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा, विद्या भारती (उत्तर क्षेत्र) के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय कुमार नड्डा, डिपार्टमेंट ऑफ होलिस्टिक एजुकेशन के निदेशक प्रो. (डॉ.) ठाकुर सुदेश कुमार रौनिया, शिक्षा महाकुंभ अभियान के संयोजक मेजर (डॉ.) शमशेर सिंह सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।



