तुम्हें राजनीति की खुजली हुई है -यह कहा था एक नेता ने मुझे!
और सच में ही मुझे भी बहुत खुजली थी चुनाव जीत कर राजनीति में आने की।
इस सिलसिले में मेरा कई नेताओं से मिलना हुआ था जिनके साथ मैंने विद्यार्थी जीवन के दौरान छात्र संघ संगठन में कार्य किया था।
मैं और मेरी तरह अन्य छात्र नेता जीतते थे तो उन नेताओं का छात्र संगठन में नाम होता था। उनका कद और बड़ा होता जाता था।
ऐसे ही एक नेता, जो तब राष्ट्रीय स्तर के हो गए थे, ने मुझे मिलने के लिए नूरपुर बुलाया था। वे मुझे किसी स्थापित भाजपा नेता के विरुद्ध इस्तेमाल करना चाहते थे।
वे रात को धर्मशाला के लिए निकले और मुझे भी अपनी गाड़ी में ले गए। रास्ते में मैंने भी उनसे चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की जिससे वे नाराज़ हो गए क्योंकि जिसकी टिकट कटनी थी वो नेता उनका खास था।
मुझसे वे इतने चिढ़े कि उन्होंने अपनी गाड़ी में से मुझे गगल में उतार दिया और वो भी रात को अकेले ही। मैंने उनके विद्यार्थी जीवन में कई खर्चे उठाए थे।
हालांकि मैं केवल उन नेता की कृपादृष्टि प्राप्त करके ही टिकट प्राप्त नहीं करना चाहता था। अपितु मैं टिकट का पात्र था।
मैंने तीनों संगठनों में अपने जीवन के अढ़ाई दशक का स्वर्णिम समय दिया था जिसके दौरान मेरे जीवन तथा नौकरी पर भी कई संकट उत्पन्न हुए थे।
मेरे पास संगठन का अनुभव था। चुनावों को लड़ने तथा जीतने की कला थी। अपने पिछड़े जिला चम्बा को विकसित करने की योजना थी।
परन्तु मुझे पता नहीं था कि आज की राजनीति में हमारे विचार, हमारी सोच मायने नहीं रखती अपितु हमारी जेब की गर्मी मायने रखती है।
उस दौरान मेरा कई नेताओं से मिलना भी हुआ था जिनमें से एक आज के गृहमंत्री श्री अमित शाह जी भी हैं।
आज मैं दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर अपने परिवार, समाज एवं जिला चम्बा के विकास के लिए अपने स्तर पर कार्य कर रहा हूँ।
जीवन में सपनों का साकार होना या न होना मायने नहीं रखता।
बस इतनी संतुष्टि होनी चाहिए कि हमने ईमानदार प्रयास किए थे।



