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नाट्य प्रतियोगिता में पथ जमशेदपुर की प्रस्तुति “खामोश अदालत जारी है” को प्रथम पुरस्कार

एप्पल न्यूज़, शिमला

अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिता में पथ जमशेदपुर के नाटक खामोश अदालत जारी है को प्रथम पुरस्कार। सार्थक सांस्कृतिक संघ,करनाल द्वारा काली बाड़ी मन्दिर हाल में कई गई चार दिवसीय अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिता में पथ जमशेदपुर की प्रस्तुति “खामोश अदालत जारी है” को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ।

इस प्रतियोगिता में 9 राज्यों की 18 मंडलियों के 270 कलाकारों ने भाग लिया। दूसरे स्थान पर ड्रामातारजी की प्रस्तुति कथा एक कंस की एवम नटरंग अबोहर की प्रस्तुति सपनो का सफर तीसरे स्थान पर रही। इसके अतिरक्त 50 से अधिक कलाकारों व निर्देशकों को स्मृति चिन्ह एवम ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।सार्थक के निर्देशक संजीव लखनपाल नें बताया कि प्रथम स्थान पाने वाली टीम को 21000 रुपये नकद व ट्रॉफी,दूज़रे को 11000 रुपये व ट्रॉफी एवम त्रियतीय को 5100 रुपये एवम ट्रॉफी दी गई।इससे पूर्व मुख्य अतिथि पूर्व नोकरशाह श्रीनिवास जोशी,कार्यक्रम अध्यक्ष रमेश सूद एवम विशिष्ट अतिथि किमी सूद नें दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आरम्भ किया।इस अवसर पर हिसार के मनीष जोशी को नाटकबाज युवा रंगकर्मी अवार्ड,इंदौर से शरद सबल को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड एम रोहतक से विश्व दीपक त्रिखा को थेटर प्रमोटर राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया।इस प्रतियोगिता में उसका नाम रंजना, गधे की बारात, कथा एक कंस की, संजोग, मुझे अमृता चाहिये, उलझन, पथों इबि कल्टर, खामोश अदालत जारी है, कगार की आग, खोल दो,हमारी मातृ भाषा हिंदी, सपनो का सफर, नागमण्डल, अभियोग, पंछी की प्रस्तुतियां हुईं।

प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता मोहमद निज़ाम को एवम सर्कश्रेष्ठ अभिनेत्री छवि दास को प्रदान किया गया।सर्कश्रेष्ठ हास्य नाटक का पुरस्कार पंछी को प्रदान किया गया। सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता विक्रम चरण रवम अभिनेत्री के एच मडालिनी डवी को सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार मिला।हास्य अभिनेता सिद्धार्थ को चुना गया जबकि महिला वर्ग में प्रियांशी सर्वश्रेष्ठ अभी नेत्री चुना गया। खलनायक के रूप में महिला में प्रियंका बनर्जी एवम पुरुष वर्ग में दिवेश यादव को पुरस्कार प्रदान किया गया।

इस अवसर पर सार्थक के अध्यक्ष संजीव लखनपाल नें सभी प्रतिभागियों एवम मुख्यातिथियों का धन्यवाद किया।मुख्य अतिथि श्रीनिवास जोशी नें अपने सम्बोधन में कहा कि नाटक का कोई मज़हब नहीं होता। उन्होंने दीन मोहम्मद का उदाहरण देते नए बताया कि उन्होंने ईद के दिवस सिरर मुंडा कर ,चोटी रख चाणक्य का रोल किया था। उन्होंने कलाकारों को आवाहन किया कि वो कला का प्रयोग समाज सुधार हेतु भी करें। इस अवसर पर अरविंद लखनपाल, पूर्णिमा लखनपाल, मेघराज लुथरा, तरुण विरमानी एवम सुशांत लखनपाल उपस्थित थे।

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