घुमारवी के दो चिकित्सकों ने विकसित की कॉर्डिसेप्स मशरूम उगाने की तकनीक

एप्पल न्यूज़, बिलासपुर

बिलासपुर जिला के घुमारवी शहर के केहलूर बायोसाइंसेज और रिसर्च सेंटर के दो डाक्टरो ने कॉर्डिसेप्स नामक एक विशेष प्रकार के मशरूम को उगाने के तकनीक विकसित किए हैं ।यह मशरूम सबसे महंगे मशरूमों मे से एक है जिसकी कीमत बाजार मे तीन से पांच लाख रुपए तक होती हैं ।

इस मशरूम की खासियत यह है कि यह विभिन्न प्रकार के औषधीय गुणों के साथ इसका उपयोग मेडिसिन बनाने के लिए भी होता है । इस मशरूम में एंटी-कैंसर, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-एजिंग, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, एंटी-डायबिटिक, एनर्जी और इम्युनिटी-बूस्टिंग गुण होते हैं। कई शोधों के अनुसार यह मशरुम सेक्स पावर और स्टैमिना बढ़ाने में मदद करता है । अत्यधिक एंटीवायरल और इम्युनिटी बूस्टिंग गुण होने के कारण यह मशरुम वर्तमान कोरोना काल में लोगो के लिए बहुत लाभदायक है ।

कॉर्डिसेप्स परजीवी मशरूम की एक प्रजाति है जिसमें लगभग 400 उप-प्रजातियां मे से एक हैं। कोर्डीसेप्स की वाइल्ड वैरायटी कोर्डीसेप्स सिनेसिस, यार्चा गुम्बा एक आयुर्वेदिक जड़ि-बुटि है जिसे हिंदी में कीड़ा जड़ी कहा जाता है। यार्चा गुम्बा नेपाली नाम है जो समुद्र तल से 3800 मीटर ऊपर नेपाल, भूटान, चीन, तिब्बत और हिमालय पर्वत पर पाया जाता है। भारत में ये केवल उत्तर भारत के पहाड़ों पे पाया जाता है जिसकी कीमत बहुत ज्यादा होती हैं ।

मशरूम का उपयोग  कई सालों से ट्रेडिशनल  मेडिसिन सिस्टम में बहुत सी बीमारियों को ठीक करने में इस्तेमाल किया जाता है। केहलूर बायो साइंसेज एंड रिसर्च  सेंटर ने अपनी लैब में कॉर्डिसेप्स प्रजाति का कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस मशरुम तैयार किया गया है ।

यह मशरूम आर्द्र जलवायु और कम तापमान में पनपती हैं। इस मुशरूम में मेडिसिनल वैल्यू वाले बहुत से बायो मेटाबॉलिट्स होते है जोकि बहुत सी दवाओं के घातक व उपयोगी होते है ।इस मुशरूम का मूल्य इसके बायो एक्टिव कम्पोनेन्ट्स के स्तर से निर्धारित होता है तथा इस में पाए जाने वाले कोर्डीसेप्सिन,पोलि सक्रीड और एडेनोसीन कई बीमारियों के उपचार में मदद करते है।

इस मशरूम को लैब में उगा सकते हैं। यह हिमाचल के किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इस मुशरूम को मात्र एक कमरे में उगाकर साल भर में पांच से दस लाख तक की कमाई की जा सकती है ।केहलूर बायोसाइंसेज एंड रिसर्च सेंटर लोगों को इसकी ट्रेनिंग देने और तकनीक साँझा करने को तैयार है । डॉ अमित और डॉ विकेश इस मुशरूम पर पिछले एक साल से काम कर रहे थे और उसके बाद तैयार कर पाए हैं । मशरूम को सुखाकर इससे कई प्रकार के उत्पादन तैयार किए जा सकते हैं ।इन डाक्टरो के द्धारा इस मुशरूम से विशेष प्रकार के हेल्थ प्रमोटिंग उत्पादन भी तैयार किए है ।

इन डाक्टरो के द्धारा इससे पहले भी मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के द्धारा कई प्रकार के शोध करके क ई उत्पादन तैयार किए गए हैं जिससे इनको एक संस्था के द्धारा बैस्ट शोधकर्ता के द्धारा नवाजा जा चुका है ।

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