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शिमला जिला के 5 मंदिरों में होगी “भोग योजना” आरंभ, एक सप्ताह में पूरी करें औपचारिकताएं- DC

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योजना के तहत भंडारा निर्माण के लिए लाइसेंस होगा जारी

उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में लिए गए अहम फैसले

एप्पल न्यूज, शिमला

जिला शिमला के पांच मंदिरों में भोग योजना लागू करने का फैसला लिया गया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित विशेष बैठक में यह फैसला लिया गया है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के माध्यम से चलाई जा रही योजना भोग के तहत जिला के मंदिरों में भंडारे को बनाया जाएगा और इसके बाद ही श्रद्धालुओं को परोसा जाएगा।

भोग यानि ‘ब्लेसफुल हाइजेनिक ऑफरिंग टु गॉड’। इस योजना के तहत मंदिर प्रबंधन को पंजीकरण एवं लाइसेंस भंडारा निर्माण एवं वितरण के लिए अनिवार्य किया जाएगा।

जिला के तारा देवी, संकट मोचन, जाखू, हाटकोटी और भीमाकाली मंदिर सराहन में भोग योजना को शुरू किया जा रहा है। उपायुक्त ने सभी मंदिर अधिकारियों को निर्देश दिए है कि इस योजना के तहत सारी औपचारिकताएं एक सप्ताह के भीतर पूरी कर ली जाए।
उपायुक्त ने कहा कि श्रद्धालुओं को गुणवत्तापूर्ण भंडारा मुहैया करवाना न्यास की प्राथमिकता है। ऐसे में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के तय मानकों के अनुसार भविष्य में भंडारा बनाया जाएगा।

हर मंदिर न्यास को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के माध्यम से लाइसेंस जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भंडारा बनाने वाले लोगों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाना अनिवार्य होगा। मंदिर की रसोई में केवल मेडिकल सर्टिफिकेट प्राप्त लोगों को ही प्रवेश मिलेगा।

उपायुक्त रखेंगे सीसीटीवी से नजर
शिमला शहर के सभी तीन मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे का लॉगिन अब डीसी कार्यालय शिमला में रहेगा। उपायुक्त तीनों मंदिरों की निगरानी स्वयं किया करेंगे। उपायुक्त ने मंगलवार को बैठक में उक्त फैसला लिया। तीनों मंदिरों में 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से निगरानी की जा रही है।

यह रहे मौजूद
बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कानून एवं व्यवस्था पंकज शर्मा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल ज्योति राणा, एसडीएम ग्रामीण मंजीत शर्मा, सहायक आयुक्त देवी चंद ठाकुर, सहायक आयुक्त भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण धर्मेंद्र सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।

क्या है भोग योजना
भोग प्रमाण पत्र भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा धार्मिक स्थलों को दिया जाने वाला एक प्रमाण पत्र है। इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक स्थलों पर भक्तों को परोसे जाने वाले प्रसाद या भोजन की स्वच्छता, सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

पहचान और पंजीकरण
राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा नोडल अधिकारी नामित किए जाते हैं, जो धार्मिक स्थलों की पहचान करते हैं। पहचाने गए धार्मिक स्थलों को एफएसएसएआई अधिनियम, 2006 के तहत लाइसेंस /पंजीकरण कराना होता है। यह प्रक्रिया एफएसएसएआई के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होती है।
एफएसएसएआई द्वारा मान्यता प्राप्त किसी तीसरी पार्टी की एजेंसी (ऑडिटिंग एजेंसी) द्वारा धार्मिक स्थल का निरीक्षण किया जाता है। यह निरीक्षण खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का मूल्यांकन करता है। इसमें रसोई की स्वच्छता, भंडारण, कच्ची सामग्री की गुणवत्ता, पानी की व्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन आदि मानक शामिल होते हैं।

प्रशिक्षण धार्मिक स्थल पर प्रसाद बनाने और परोसने में लगे खाद्य हैंडलर (कर्मचारी) को एफएसएसएआई द्वारा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण भागीदार द्वारा खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण और प्रमाणन (एफओएसटीएसी) के तहत प्रशिक्षित किया जाता है।

इस प्रशिक्षण में व्यक्तिगत स्वच्छता, खाद्य पदार्थों के सुरक्षित रख-रखाव, क्रॉस-संदूषण से बचाव और सही तापमान नियंत्रण जैसी बातें सिखाई जाती हैं।

लाइसेंसिंग
12 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक की टर्नओवर वाले खाद्य कारोबारी को खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य कारोबार का अनुज्ञापन और रजिस्ट्रीकरण) विनियम 2011 में विहित प्रक्रिया के अनुसार लाइसेंस लेना होता है।

  • लाइसेंस की सभी शर्तों के आधार पर सुरक्षा, साफ-सफाई और स्वच्छता संबंधी अपेक्षाओं का हर समय पालन करना होगा।
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