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शिक्षा मंत्री ने पदोन्नत प्रवक्ताओं को 18 सितंबर तक दिए कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश

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हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को आपदा प्रभावित छात्रों को प्रमाण पत्र की निःशुल्क प्रतिलिपि प्रदान करने के निर्देश

एप्पल न्यूज, शिमला

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज वरिष्ठ अधिकारियों और स्कूल शिक्षा के उच्च, प्राथमिक और गुणवत्ता शाखा के उप-निदेशकों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने राज्य में शिक्षा से संबंधित योजनाओं, सुधारों और अन्य महत्त्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हम विद्यार्थियों की निर्बाध पढ़ाई सुनिश्चित कर रहे हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा वर्तमान राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा इस प्रतिबद्धता के लिए गंभीर चुनौती बनकर सामने आई है।

उन्होंने भारी बारिश से स्कूलों को हुए व्यापक नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्राकृतिक आपदा से अब तक 1,125 शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हुए हैं और अनुमानित 59.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में 646 स्कूलों में आपदा संबंधी मरम्मत के लिए 51.13 करोड़ रुपये जारी किए गए जबकि वर्ष 2025 सितंबर में अब तक 77 स्कूलों के लिए 13.22 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

मंडी ज़िला को वर्ष 2023 से सितंबर 2025 तक सबसे अधिक 16.19 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने पुनर्निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश दिए ताकि शैक्षणिक गतिविधियां बाधित न हों।
शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि आपदा पश्चात आवश्यकता मूल्यांकन (पीडीएनए) के तहत प्राप्त धनराशि का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए, और 75 प्रतिशत से अधिक क्षति वाले स्कूलों को प्राथमिकता दी जाए।

धनराशि के उपयोग की रिपोर्ट पांच दिनों के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए, अन्यथा उपयोग नहीं की गई राशि तत्काल आवश्यकता वाले अन्य संस्थानों को दे दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षतिग्रस्त स्कूलों के लिए भवन किराए पर लेने की सुविधा भी प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड उन छात्रों को बिना किसी शुल्क के प्रमाण-पत्र की  प्रतिलिपि जारी करेगा जिनके दस्तावेज़ आपदा के कारण नष्ट हो गए हैं।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो प्रवक्ता 18 सितंबर तक कार्यभार ग्रहण नहीं करेंगे, उनकी पदोन्नति रद्द कर दी जाएगी और यह अवसर अगले पात्र उम्मीदवारों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग में अनुशासन और जवाबदेही से समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुशासनहीनता और अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उप-निदेशकों को निदेशालय स्तर पर उचित अवकाश आवेदन प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने उप-निदेशकों को अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

उन्होंने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो), एनडीपीएस अधिनियम और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित संवेदनशील मामलों में लंबित जांचों की भी समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसे अपराधों के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि जांच में तेजी लाई जानी चाहिए, हर स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

ऐसी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए जिससे यह स्पष्ट संदेश जाए कि शिक्षा विभाग में कदाचार, भ्रष्टाचार या कर्तव्यहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने उप-निदेशकों को नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए कहा कि नियमित निरीक्षण जवाबदेही की रीढ़ हैं।

उन्होंने कहा कि स्कूल की संपत्तियों की सुरक्षा, नए भवनों के लिए सुरक्षित स्थानों का चयन और कर्मचारियों का प्रभावी प्रबंधन शिक्षा विभाग के उप-निदेशकों की ज़िम्मेदारी है।
रोहित ठाकुर ने छात्र नामांकन के अनुसार शिक्षकों के युक्तिकरण की भी समीक्षा की।

उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम तीन से चार स्कूलों में सभी शैक्षणिक संकायों के विकल्प के साथ पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध होने चाहिए और अनावश्यक प्रतिनियुक्तियां रद्द की जानी चाहिए।

उन्होंने विज्ञान पाठ्यक्रम में घटते नामांकन पर चिंता व्यक्त की और निर्देश दिए कि अधिक से अधिक छात्रों को विज्ञान विषय चुनने के लिए प्रोत्साहित करने के दृष्टिगत सुविधाओं में सुधार किया जाना चाहिए।
निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली ने कहा कि विभाग को सशक्त बनाने के लिए अनुशासन और सुधारों का उचित कार्यान्वयन महत्त्वपूर्ण है।

उन्होंने उप-निदेशकों को स्कूलों की नियमित निगरानी करने और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में सचिव शिक्षा राकेश कंवर, सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड मेजर विशाल, वरिष्ठ अधिकारी और सभी उप-निदेशक उपस्थित थे।

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