एप्पल न्यूज़, शिमला
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला में हालिया मारपीट और सुरक्षा चूक के मामले ने तूल पकड़ लिया है। रेज़िडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने 27 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है।
इस संबंध में RDA ने कॉलेज प्रशासन को औपचारिक पत्र सौंपते हुए अपनी मांगें स्पष्ट कर दी हैं। डॉक्टरों के इस फैसले से अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।

RDA के अनुसार, 26 दिसंबर को IGMC शिमला, HMOA हिमाचल प्रदेश और SAMDCOT शिमला के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
बैठक में अस्पताल परिसर में हुई कथित मारपीट, भीड़ द्वारा डराने-धमकाने, मीडिया ट्रायल और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच शुरू करने का आश्वासन भी दिया गया।
रेज़िडेंट डॉक्टरों का आरोप है कि IGMC जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थान में भीड़ द्वारा डराने-धमकाने की घटना हुई, जिससे न केवल डॉक्टरों की् और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए, बल्कि अस्पताल का सामान्य कामकाज भी बाधित हुआ।
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी घटनाएं कार्यस्थल को असुरक्षित बनाती हैं और इसका सीधा असर मरीजों की देखभाल पर पड़ता है।
RDA ने अपनी प्रमुख मांगों में डॉ. राघव के खिलाफ जारी टर्मिनेशन आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग की है। इसके अलावा अस्पताल परिसर में हुई कथित मॉब इंटिमिडेशन की घटना पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर तुरंत कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

डॉक्टरों का यह भी कहना है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि डॉ. राघव को कथित तौर पर जान से मारने और देश छोड़ने की धमकी दी गई, जिसे गंभीर अपराध मानते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
साथ ही, IGMC में पहले से चिन्हित सीसीटीवी कवरेज की कमी और सुरक्षा खामियों को समय रहते दूर न करने के लिए जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की गई है।
RDA ने साफ किया है कि 27 दिसंबर 2025 को सुबह 9:30 बजे से सभी रेज़िडेंट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान ओपीडी, नियमित सेवाएं और वैकल्पिक ऑपरेशन थिएटर बंद रहेंगे। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।
डॉक्टरों की हड़ताल के ऐलान के बाद मरीजों और उनके परिजनों की चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं, अस्पताल प्रशासन और सरकार पर अब मामले का जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया है।
यदि समय रहते मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो IGMC सहित पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।







