IGMC विवाद- BJP का असली चेहरा आया सामने, एक MLA कहता है डॉक्टर को निष्कासित करो दूसरा कहता है निष्कासन वापस लो, सरकार ने घबराहट में लिया फैसला- चौहान

IMG_20260414_194415
previous arrow
next arrow

भाजपा पर राजनीतिक हस्तक्षेप और सरकार पर घबराहट में फैसले लेने का आरोप

एप्पल न्यूज़, शिमला

Communist Party of India (Marxist) की हिमाचल प्रदेश राज्य समिति ने IGMC अस्पताल में एक मरीज और एक मेडिकल अधिकारी के बीच हुई घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पार्टी का कहना है कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, जिसे जानबूझकर बदसूरत मोड़ लेने दिया गया और इसमें स्पष्ट रूप से राजनीतिक हस्तक्षेप देखने को मिला।
सीपीआई(एम) के अनुसार अब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है। एक भाजपा विधायक ने मेडिकल अधिकारी को सेवा से हटाने की मांग करते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी, जबकि एक अन्य भाजपा विधायक ने मुख्यमंत्री से कथित रूप से पीड़ित मेडिकल अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई को वापस लेने की मांग की है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि इससे साफ होता है कि Bharatiya Janata Party एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने में विफल रही है और अशांत हालात का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। सीपीआई(एम) का कहना है कि भाजपा कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का कोई भी अवसर हाथ से जाने नहीं देना चाहती।

यह घटना बदसूरत मोड़ लेने दी गई और इसमें स्पष्ट राजनीतिक रंग दिखाई देता है। अब सच सामने आ चुका है—एक भाजपा विधायक ने मेडिकल अधिकारी को सेवा से हटाए जाने की मांग करते हुए गंभीर परिणामों की धमकी दी, जबकि दूसरे भाजपा विधायक ने मुख्यमंत्री से कथित प्रताड़ना को वापस लेने की अपील की है।

इससे स्पष्ट है कि Bharatiya Janata Party एक जिम्मेदार विपक्ष की तरह व्यवहार करने में विफल रही है और अशांत परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। उनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए उकसावे का कोई अवसर न छोड़ना प्रतीत होता है।

पार्टी ने सरकार की प्रतिक्रिया को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सीपीआई(एम) के अनुसार सरकार ने इस मामले में “घबराहट में लिया गया फैसला” किया है, जो आमतौर पर तब देखने को मिलता है जब हालात बिगड़ रहे हों।

पार्टी ने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकार को आंशिक सच्चाई के आधार पर निर्णय नहीं लेने चाहिए, बल्कि कानून के दायरे में रहते हुए निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से काम करना चाहिए। इस मामले में संबंधित कार्रवाई भारतीय सिविल सेवा नियमों के तहत ही की जानी चाहिए।
सीपीआई(एम) ने सभी पक्षों से अपील की है कि इस विवाद को और न बढ़ाया जाए, खासकर क्षेत्रवाद जैसी पिछड़ी सोच का सहारा लेकर। पार्टी का कहना है कि इस मुद्दे को आगे खींचने का कोई ठोस आधार नहीं है और इसे आपसी समझदारी से सुलझाया जाना चाहिए।
पार्टी ने सरकार से मांग की है कि मेडिकल अधिकारी के खिलाफ की गई कथित प्रताड़ना को तुरंत वापस लिया जाए और एक निष्पक्ष व पारदर्शी जांच कराई जाए। जांच के दौरान संबंधित मेडिकल अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए, जो बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए संभव नहीं है।
इसके साथ ही सीपीआई(एम) ने यह भी कहा कि मेडिकल अधिकारियों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस दौरान गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।


यह बयान सीपीआई(एम) हिमाचल प्रदेश राज्य समिति के सचिव Sanjay Chauhan द्वारा जारी किया गया।

Share from A4appleNews:

Next Post

हड़ताल पर गए डॉक्टरों के लिए SOP जारी, एमर्जेन्सी और इंडोर सेवाएं सुचारु रखने के आदेश, छुट्टी पर गए डॉक्टर वापस बुलाए

Sat Dec 27 , 2025
एप्पल न्यूज़, शिमला राज्य में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) की चल रही हड़ताल के मद्देनज़र मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसके लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने कड़े मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs) जारी किए हैं। ये निर्देश Directorate of Medical Education & […]

You May Like

Breaking News