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शिमला में ODOP के जरिए हिमाचल के उत्पादों को मिला नया बाज़ार, 5.29 करोड़ के आशय पत्र से MSME सेक्टर को मिली रफ्तार

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एप्पल न्यूज़, शिमला

हिमाचल प्रदेश के जिला विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय और डिजिटल बाज़ार से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 के दौरान देखने को मिला।

3 से 5 जनवरी 2026 तक शिमला में आयोजित इस महोत्सव के अंतर्गत एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) कार्यक्रम पर आधारित रिज़ल्ट ओरिएंटेड रिवर्स बायर–सेलर मीट का आयोजन किया गया, जिसने प्रदेश के एमएसएमई और स्थानीय उत्पादों के भविष्य को नई दिशा दी।

12 जिलों की पहचान, 12 खास उत्पाद

हिमाचल प्रदेश उद्योग विभाग ने भारत सरकार की प्रमुख योजना ओडीओपी के अंतर्गत प्रदेश के 12 जिलों के 12 विशिष्ट उत्पादों की पहचान की गई है। बीते कुछ वर्षों से विभाग इन उत्पादों की ब्रांडिंग, वैल्यू-चेन डेवलपमेंट, मार्केट गैप एनालिसिस और बाज़ार चुनौतियों पर निरंतर कार्य कर रहा है।

इसी कड़ी में यह रिवर्स बायर–सेलर मीट एक ठोस और व्यावहारिक पहल के रूप में सामने आई। उद्योग विभाग द्वारा 10 ओडीओपी उत्पादों के लिए कुल ₹5.29 करोड़ के आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए।

ई कॉमर्स, ओएनडीसी और एमएसआईसी से सीधा संवाद

ओडीओपी उत्पादों को प्रभावी मार्केटिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने और प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स कंपनियों से जोड़ने के उद्देश्य से भारत सरकार की ओर से इन्वेस्ट इंडिया को इस आयोजन से जोड़ा गया, ताकि एम्पैनल्ड वेंडर्स को सीधे जोड़ा जा सके।

इसके साथ ही ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) और नेशनल समाल इंडस्ट्रीज कार्पोरेशन (एमएसआईसी) ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और ओडीओपी उत्पादों के विक्रेताओं के साथ विस्तार से संवाद किया।

इस रिवर्स बायर–सेलर मीट में फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ओर्गेनाइजेशन ( एफआईईओ) ने नेटवर्किंग पार्टनर की भूमिका निभाई, जिससे निर्यात संभावनाओं को भी नया आयाम मिला।

शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी से बढ़ा आयोजन का महत्व

इस महत्वपूर्ण आयोजन की अध्यक्षता माननीय उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने की। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) आर.डी. नज़ीम, निदेशक उद्योग,डॉ. यूनुस, अतिरिक्त निदेशक उद्योग तिलक राज शर्मा तथा संयुक्त निदेशक उद्योग रमेश वर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

ओडीओपी स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम में 12 ओडीओपी स्टॉल लगाए गए, जिनमें विभिन्न जिलों के उत्पादों की झलक देखने को मिली। इन स्टॉल्स ने न केवल आगंतुकों का ध्यान खींचा, बल्कि खरीदारों और विक्रेताओं के बीच व्यावहारिक संवाद का मजबूत आधार भी तैयार किया।

₹5.29 करोड़ के आशय पत्र, 10 उत्पादों को मिली बड़ी सफलता

उद्योग विभाग द्वारा निवेश अवसरों की प्रस्तुति और खरीदार–विक्रेता के बीच गहन बातचीत के बाद 10 ओडीओपी उत्पादों के लिए कुल ₹5.29 करोड़ के आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए।

यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि स्थानीय उत्पादों को सही मंच, सही नेटवर्क और सही नीति समर्थन मिले, तो वे बड़े बाज़ार में अपनी जगह बना सकते हैं।
जिन 10 ओडीओपी उत्पादों के आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए, उनमें चंबा जिला से चंबा रुमाल, लाहौल–स्पीति से सी-बकथॉर्न के उप-उत्पाद, कांगड़ाजिला से कांगड़ा चाय व कांगड़ा पेंटिंग, कुल्लू जिला से ऊनी शॉल, सिरमौर जिला से जिंजर–गार्लिक पेस्ट, किन्नौर जिला से चुल्ली ऑयल, कुल्लू जिला से कुल्लू हैंडलूम उत्पाद शामिल हैं।

मंत्री का स्पष्ट संदेश: आशय पत्रों को कारोबार में बदलिए

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने उद्योग विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए कि खरीदारों और विक्रेताओं के साथ नियमित फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए, ताकि ये आशय पत्र केवल कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक व्यावसायिक लेन-देन में परिवर्तित हों।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि शेष दो ओडीओपी उत्पादों को आगामी ओडीओपी कार्यक्रमों में विशेष रूप से पिच किया जाए, ताकि संतुलित क्षेत्रीय विकास के उद्देश्य से प्रोडक्ट सेंट्रिक इंडस्ट्रियल हब्स विकसित किए जा सकें।

ब्रांडिंग और वैल्यू-चेन को मिलेगी मजबूती

अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) आर.डी. नज़ीम ने कहा कि ओडीओपी के तहत आयोजित यह रिवर्स बायर–सेलर मीट जिला विशिष्ट उत्पादों को मजबूत ब्रांड बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे उनकी वैल्यू-चेन और बाज़ार पहुंच और सशक्त होगी।
निदेशक उद्योग डॉ. यूनुस ने इसे स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक आशाजनक शुरुआत बताते हुए कहा कि उद्योग विभाग ओडीओपी आधारित कार्यक्रमों सहित विभिन्न पहलों के माध्यम से एमएसएमई विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रेरणा बनेगा मॉडल

कुल मिलाकर, हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 के तहत आयोजित यह ओडीओपी रिवर्स बायर–सेलर मीट न केवल एक सफल आयोजन साबित हुआ, बल्कि यह अन्य राज्यों और जिलों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।

यह पहल दर्शाती है कि स्थानीय पहचान, नीति समर्थन और आधुनिक बाज़ार तंत्र के मेल से हिमाचल के उत्पाद स्थानीय से वैश्विक बनने की पूरी क्षमता रखते हैं।

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