एप्पल न्यूज़, शिमला/दिल्ली
हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई में प्रदेश मंत्रिमंडल दिल्ली में धरना दे सकता है।
यह धरना जंतर मंतर, लोकसभा या राज्यसभा के बाहर आयोजित करने की रणनीति पर विचार चल रहा है।
कांग्रेस नेतृत्व से दो अहम बैठकें
दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से अलग-अलग बैठकें कीं।
पहली बैठक में अमेरिका के साथ संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से हिमाचल के सेब उत्पादकों पर पड़ने वाले असर पर चर्चा हुई।

बताया गया कि लगभग 5500 करोड़ रुपये के सेब उद्योग पर खतरा मंडरा सकता है। अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ से सेब आयात शुल्क में कटौती (50% से 25% और 20%) से स्थानीय बागबानों को नुकसान की आशंका है।
राहुल गांधी ने भरोसा दिलाया है कि वह विदेशी सेब आयात और हिमाचल के बागबानों के मुद्दे को लोकसभा में उठाएंगे। बैठक में आनंद शर्मा और रजनी पाटिल भी मौजूद रहीं।
दूसरी बैठक में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद करने के फैसले पर चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का रवैया कांग्रेस शासित राज्यों को कमजोर करने वाला है।
उनका दावा है कि पिछले पांच वर्षों में हिमाचल को लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की RDG सहायता मिली थी और अब इसे बिना पूर्व सूचना बंद कर दिया गया, जिससे राज्य को हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि यह मुद्दा राज्यसभा में भी उठाया जाएगा और पार्टी इस पर निर्णायक लड़ाई लड़ेगी।
कांग्रेस नेतृत्व ने निर्देश दिए हैं कि इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह मजबूती से उठाया जाए। किसानों और बागबानों के हित में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान से रैलियों की शुरुआत भी प्रस्तावित है।
स्पष्ट है कि RDG और FTA के मुद्दे पर हिमाचल सरकार और कांग्रेस केंद्र सरकार के खिलाफ खुली राजनीतिक लड़ाई की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में दिल्ली में संभावित धरना इस संघर्ष को और तेज कर सकता है।







