एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के ‘सीबीएसई संबद्ध स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ में शिक्षकों की भर्ती को लेकर चल रहे विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भर्ती प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की नीति को वैध ठहराते हुए भर्ती पर लगी रोक को हटा दिया है।
इस फैसले से उन सैकड़ों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे थे।
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि इन विशेष स्कूलों के लिए शिक्षकों का अलग ‘सब-कैडर’ (Sub-Cadre) बनाना पूरी तरह तर्कसंगत और कानूनी है।
कोर्ट ने कहा कि यह सरकार का नीतिगत निर्णय है, जिसमें तब तक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता जब तक यह कानून के दायरे में है।
खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि 5 मार्च 2026 को आयोजित लिखित स्क्रीनिंग टेस्ट का परिणाम तुरंत घोषित किया जाए और इसके बाद काउंसलिंग व नियुक्ति प्रक्रिया को बिना देरी के आगे बढ़ाया जाए।
अपने फैसले में अदालत ने भर्ती नीति की पारदर्शिता पर भी मुहर लगाई है। कोर्ट ने कहा कि योजना का पैरा 5.5 “निष्पक्ष, न्यायसंगत, पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ” है, जिससे भर्ती प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित होती है।
साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बेहतर नीति बनाना सरकार का अधिकार है और न्यायालय का काम केवल यह देखना है कि वह नीति कानूनी है या नहीं।

यदि नीति वैध है, तो न्यायालय सरकार के विवेक में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
महत्वपूर्ण रूप से, 20 मार्च 2026 को भर्ती प्रक्रिया पर लगाए गए सभी अंतरिम आदेश (स्टे) अब रद्द कर दिए गए हैं। हालांकि, जिन मुद्दों को इन याचिकाओं (CWP 2427 और 2501/2026) में नहीं उठाया गया था, उन्हें भविष्य के लिए खुला रखा गया है।
इस निर्णय के बाद अब प्रदेश के ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी होने की उम्मीद है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।







