एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारियों की सेवा की शर्त अधिनियम, 2024 को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया है।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने 445 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए कहा कि यह अधिनियम संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 3, 5 और 9 संवैधानिक ढांचे के खिलाफ हैं। अदालत ने कहा कि इन धाराओं को हटाने के बाद अधिनियम में कुछ भी महत्वपूर्ण शेष नहीं बचता, इसलिए पूरे एक्ट को निरस्त करना आवश्यक है।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित कर्मचारियों को तीन माह के भीतर देय वित्तीय लाभ और वरिष्ठता प्रदान की जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि इस अधिनियम के आधार पर राज्य सरकार या उसके अधिकारियों द्वारा की गई सभी कार्रवाइयाँ असंवैधानिक और अमान्य मानी जाएंगी।
इसके तहत जारी लाभ वापसी, राहत निरस्तीकरण या वसूली संबंधी सभी आदेश भी रद्द कर दिए गए हैं।
यह मामला उन हजारों कर्मचारियों से जुड़ा था जिन्हें वर्ष 2003 के बाद अनुबंध आधार पर नियुक्त किया गया था और बाद में नियमित किया गया।
कर्मचारियों का तर्क था कि उनकी अनुबंध सेवा अवधि को नियमित सेवा में नहीं जोड़ा गया और वित्तीय लाभ नहीं दिए गए।
जब अदालतों ने उनके पक्ष में निर्णय दिया तो सरकार ने लाभ वापस लेने के लिए यह अधिनियम लागू किया, जिसे कर्मचारियों ने चुनौती दी।
हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार न्यायपालिका के निर्णयों को कानून बनाकर पलट नहीं सकती। अदालत ने इसे संविधान के मूल ढांचे में हस्तक्षेप जैसा माना।
इस फैसले से प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को राहत मिलेगी और लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त होने की उम्मीद है।







