एप्पल न्यूज, शिमला
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय में आज रक्तदान दिवस के अवसर पर एक विशेष रक्तदान एवं अंगदान शिविर का आयोजन किया गया।
इस आयोजन का शुभारंभ राज्य विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां द्वारा पूर्वाह्न 11:30 बजे डॉ. यशवंत सिंह परमार पुस्तकालय कक्ष में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
यह शिविर खेल एवं सांस्कृतिक संघ विधान सभा के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य समाज में रक्तदान एवं अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर विधान सभा सचिव यशपाल शर्मा, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल शिमला की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. गंगा, विधान सभा सचिवालय के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेश दत्ता, संयुक्त सचिव बेगराम कश्यप, संयुक्त निदेशक हरदयाल भारद्वाज, संघ के अध्यक्ष अरविंद शर्मा, महासचिव दीपक ठाकुर तथा अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
रक्तदान को बताया “महादान”
विधान सभा अध्यक्ष पठानियां ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि रक्तदान वास्तव में “महादान” है, जिसके माध्यम से अनेक जिंदगियाँ बचाई जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि 60 वर्ष से कम आयु वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि किसी की ज़िंदगी बचाने में अमूल्य योगदान भी है।
उन्होंने बताया कि रक्त की आवश्यकता मुख्यतः एनीमिया से पीड़ित रोगियों, प्रसव के दौरान महिलाओं, आपातकालीन दुर्घटनाओं, शल्य चिकित्सा एवं अन्य रक्त विकारों के लिए होती है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस शिविर में विशेष रूप से महिला कर्मचारियों की भागीदारी अत्यधिक उत्साहजनक रही।
अंगदान शिविर एवं SOTTO स्टॉल का अवलोकन
कार्यक्रम में State Organ and Tissue Transplant Organisation (SOTTO) हिमाचल प्रदेश द्वारा एक जागरूकता स्टॉल भी लगाया गया, जहां अंगदान से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई।

विधान सभा अध्यक्ष ने स्वयं इस स्टॉल का अवलोकन किया और अंगदान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए भविष्य में अंगदान करने की इच्छा प्रकट की।
पठानियां ने कहा कि, “अंगदान एक प्रकार से पुनर्जन्म देने जैसा है। यदि हम मरने के बाद अपने अंगों को दान करने का संकल्प लें, तो अनेक जिंदगियाँ बच सकती हैं। यह एक पवित्र और मानवीय कार्य है जिसे प्रत्येक नागरिक को अपनाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि 18 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति देश के कानूनी नियमों के अंतर्गत स्वैच्छिक रूप से अंगदान की शपथ ले सकते हैं।
SOTTO की जानकारी और आंकड़े
SOTTO की IEC कंसल्टेंट रामेश्वरी ने बताया कि अब कोई भी नागरिक www.sottohimachal.in वेबसाइट के माध्यम से QR कोड स्कैन करके घर बैठे अंगदान के लिए पंजीकरण कर सकता है। यह प्रक्रिया आधार कार्ड से जुड़ी होती है और पूरी तरह पारदर्शी एवं सरल है।

अब तक प्रदेश से 2800 से अधिक लोगों ने अंगदान की शपथ पत्र भरकर अपनी स्वेच्छा जाहिर की है।
उन्होंने बताया कि अंगदान दो प्रकार से संभव है:
- जीवित व्यक्ति द्वारा — जिसमें नजदीकी रिश्तेदारों को किडनी, लीवर का भाग, पेनक्रियाज दान किया जा सकता है।
- ब्रेन डेड व्यक्ति द्वारा — जिसके आठ अंग (जैसे दिल, फेफड़े, किडनी, लीवर, आंखें आदि) किसी अन्य को नया जीवन दे सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रेन डेड स्थिति और कोमा में अंतर होता है; ब्रेन डेड व्यक्ति के मस्तिष्क की मृत्यु हो चुकी होती है, जबकि शारीरिक क्रियाएँ वेंटीलेटर पर चलती रहती हैं।
भारत में अंगदान की स्थिति
देश में प्रतिवर्ष:
- लगभग 2 लाख मरीजों को किडनी की आवश्यकता होती है, परंतु केवल 10,000 ट्रांसप्लांट हो पाते हैं।
- 30,000 मरीजों को लीवर की आवश्यकता होती है, जबकि सिर्फ 2,000 प्रत्यारोपण संभव हो पाते हैं।
- 10 लाख लोगों को नेत्रदान की आवश्यकता होती है, जबकि केवल 50,000 नेत्र प्रत्यारोपण हो पाते हैं।

इसकी मुख्य वजह अंगदान व नेत्रदान के प्रति जागरूकता की कमी है। श्रीमती रामेश्वरी ने बताया कि अंगदान जाति, धर्म, लिंग या समुदाय से परे, कोई भी नागरिक कर सकता है।
सेना के प्रति सम्मान – ऑपरेशन “सिन्दूर” पर प्रतिक्रिया
मीडिया द्वारा “ऑपरेशन सिन्दूर” को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में विधान सभा अध्यक्ष श्री पठानियां ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और निष्ठा की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि, “भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेना है। ऑपरेशन सिन्दूर में उन्होंने पाकिस्तान के दुस्साहस का मुँहतोड़ जवाब दिया है। पूरा देश सेना पर गर्व करता है।
भविष्य में यदि कोई भी शत्रु देश भारत की ओर आँख उठाकर देखने की कोशिश करेगा, तो उसे उसी की भाषा में उत्तर मिलेगा।”
यह आयोजन न केवल मानवीय सेवा की मिसाल बना, बल्कि यह संदेश भी दिया कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को आगे आकर रक्तदान और अंगदान जैसे पुनीत कार्यों में भाग लेना चाहिए।






