एप्पल न्यूज, धर्मशाला
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत हिमाचल प्रदेश में कारीगरों और परंपरागत कौशल से जुड़े लोगों को बड़ा लाभ मिल रहा है।
केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने राज्यसभा में बताया कि प्रदेश में अब तक 1,83,245 अभ्यर्थियों का चयन किया जा चुका है।
मंत्री ने यह जानकारी राज्यसभा सांसद सुश्री इंदु बाला गोस्वामी द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि देशभर में योजना की प्रगति तेज़ रही है और हिमाचल सहित पड़ोसी राज्यों में भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिला है।

पड़ोसी राज्यों में चयन की स्थिति
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अनुसार—
पंजाब में 2,01,151
हरियाणा में 7,30,196
उत्तराखंड में 2,77,364
जम्मू-कश्मीर में 4,94,415
चंडीगढ़ में 4,119 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है।
देशभर में 2.72 करोड़ से अधिक प्रशिक्षित
मंत्री ने बताया कि योजना के आरंभ से अब तक देशभर में 2,72,52,986 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
इनमें—
कर्नाटक शीर्ष पर है, जहां 32,32,937 लोगों को प्रशिक्षण मिला।
लक्षद्वीप सबसे नीचे है, जहां केवल 1,446 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया।
30 लाख के लक्ष्य की पूर्ति
सरकार ने इस योजना में 30 लाख कारीगरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे पूरा कर लिया गया है। योजना के तहत देशभर में बढ़ई, लोहार, कुम्हार, मोची, सुनार सहित 18 पारंपरिक ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाता है।
13,000 करोड़ का बजट प्रावधान
मंत्री करंदलाजे ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक योजना के लिए कुल 13,000 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
दो राज्यों में समिति गठन नहीं
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु ने अभी तक योजना के क्रियान्वयन के लिए जरूरी स्टेट मॉनिटरिंग कमेटी और जिला क्रियान्वयन समिति का गठन नहीं किया है, जिससे वहां प्रार्थना-पत्रों की प्रोसेसिंग प्रभावित हो रही है।







