एप्पल न्यूज़, बिलासपुर
ग्राम पंचायत बाड़नू के पुनर्गठन को लेकर स्थिति लगातार स्पष्ट होती जा रही है। गांव बाड़नू को ग्राम पंचायत सुई-सुरहाड़ में शामिल किए जाने के समर्थन में न केवल ग्रामीण बल्कि सुई-सुरहाड़ पंचायत के पूर्व जनप्रतिनिधि भी खुलकर सामने आ गए हैं।
इस संबंध में उपायुक्त बिलासपुर को भेजे गए लिखित पत्र में बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 18 दिसंबर 2025 के तहत गांव बाड़नू को ग्राम सभा सुई-सुरहाड़ में शामिल करने का निर्णय लिया गया है, जिसका अधिकांश ग्रामीणों ने स्वागत किया है।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सुई-सुरहाड़ पंचायत के गांव सुई के कुछ लोग (करीब 46) अनावश्यक रूप से इस अधिसूचना का विरोध कर रहे हैं, जबकि गांव बाड़नू के ग्रामीणों को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
पत्र के अनुसार ग्राम सभा बाड़नू-दियाथली ने पहले ही 28 नवंबर 2024 को प्रस्ताव संख्या 4 के माध्यम से अपनी सहमति दी थी, वहीं ग्राम पंचायत सुई-सुरहाड़ ने भी 24 अक्टूबर 2025 को प्रस्ताव संख्या 5 पारित कर गांव बाड़नू को पंचायत में शामिल करने पर सहमति जताई थी।

भौगोलिक स्थिति का हवाला देते हुए बताया गया है कि गांव बाड़नू की दूरी अपनी वर्तमान पंचायत दियाथली मुख्यालय से सड़क व पैदल मार्ग से लगभग 5.5 किलोमीटर है, जबकि सुई-सुरहाड़ पंचायत से पैदल दूरी केवल 2.5 किलोमीटर है।
ऐसे में प्रशासनिक सुविधा और जनहित को देखते हुए सुई-सुरहाड़ पंचायत में शामिल किया जाना अधिक उपयुक्त है।
इस पुनर्गठन के समर्थन में पूर्व प्रधान सुरेंदर भारती, अशोक ठाकुर, बीडीसी सदस्य सीता राम, पूर्व बीडीसी अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर, पूर्व प्रधान कांता ठाकुर, पूर्व उपप्रधान अमर ठाकुर सहित धर्म पाल, बाबू राम, हरि सिंह, रूप लाल कौड़ल, कर्म चंद और अन्य ग्रामीण सामने आए हैं।

समर्थकों का कहना है कि पंचायत पुनर्गठन से विकास कार्यों में तेजी आएगी और लगभग 150 परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। ग्रामीणों व पूर्व जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जनभावनाओं और ग्राम सभाओं की सहमति को ध्यान में रखते हुए गांव बाड़नू को शीघ्र ग्राम पंचायत सुई-सुरहाड़ में शामिल किया जाए।







