हिमाचल में 8.42 लाख से अधिक लाभार्थी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से लाभान्वित, 3 वर्षों में एक लाख नए लाभार्थी जोड़े

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समावेशी शासन की दिशा में सशक्त कदमः सामाजिक सुरक्षा से सुदृढ़ हो रहा वंचित वर्ग
 एप्पल न्यूज़, शिमला

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने समावेशी विकास, कल्याण और सामाजिक न्याय को अपनी शासन-प्रणाली के केंद्र में रेखा है। प्रगतिशील सुधारों और जन कल्याण केन्द्रित प्रयासों के माध्यम से राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक सहायता समयबद्ध, सम्मानजनक और पारदर्शी तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचे।
राज्य सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रणाली में किए गए महत्त्वपूर्ण सुधारों ने लाभार्थियों के लिए प्रक्रियाओं को सरल और सुलभ बनाया है। विधवा, परित्यक्त एवं एकल महिलाओं तथा 40 से 69 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए आय सीमा और ग्राम सभा की स्वीकृति की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।

इस निर्णय से पात्र आवेदकों को पेंशन प्राप्त करने में होने वाली प्रशासनिक बाधाएं दूर हुई हैं और बड़ी संख्या में लाभार्थी सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं।


इन सुधारों के परिणामस्वरूप वर्तमान में राज्यभर में लगभग 8.42 लाख लोग सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिक, विधवाएं, एकल महिलाएं और दिव्यांगजन शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार 1,04,740 लाभार्थी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, 5,04,253 वृद्धावस्था पेंशन, 25,414 इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन, 1,26,808 विधवा, परित्यक्त एवं एकल महिला पेंशन, 1,340 इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन तथा 78,291 दिव्यांग राहत भत्ता प्राप्त कर रहे हैं।

बीते तीन वर्षों में 99,799 नए पेंशन मामलों की स्वीकृति सामाजिक सुरक्षा के दायरे के निरंतर विस्तार को दर्शाती है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए फरवरी 2024 से 69 आयुवर्ग तक की महिलाओं के लिए मासिक पेंशन राशि को बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है। इससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने ‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना’ के अंतर्गत लंबित भुगतानों को शीघ्र जारी करने के भी निर्देश दिए हैं।

साथ ही, पांगी, लाहौल-स्पीति, डोडरा क्वार और कुपवी जैसे दुर्गम एवं जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए भी एक व्यापक और समावेशी सहायता ढांचा विकसित कर रही है। बिना किसी आय सीमा के दिव्यांग राहत भत्ता प्रदान कर सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित की गई है।

दिव्यांग व्यक्तियों को 1,150 रुपये से 1,700 रुपये तक की मासिक पेंशन दी जा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में दिव्यांग विद्यार्थियों को बिना आय सीमा के 625 रुपये से 5,000 रुपये तक की मासिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है, जिससे 3,100 विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं और 3.77 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है।
इसके अतिरिक्त, दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह हेतु 25,000 रुपये से 50,000 रुपये तक का विवाह प्रोत्साहन अनुदान दिया जा रहा है। अब तक 212 लाभार्थियों को 74.49 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है।

विशेष गृहों और वृद्धाश्रमों में रहने वाले दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को प्रमुख त्योहारों पर प्रति व्यक्ति 500 रुपये का उत्सव अनुदान भी दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 2,128 लाभार्थियों को 75.43 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं।
शासन और सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा दिया है।

लाभार्थी पहचान, स्वीकृति और पेंशन वितरण की डिजिटल व्यवस्था ने पारदर्शिता, सटीकता और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है।
सामाजिक न्याय, सशक्तिकरण और योजनाओं में समावेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

सरकार संवेदनशील प्रशासन की मिसाल कायम करते हुए पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित कर रही है।

पात्रता की बाधाओं को हटाकर, वित्तीय सहायता बढ़ाकर और सम्मान व सुगमता पर ध्यान केंद्रित करके, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार सामाजिक सुरक्षा को केवल सहायता नहीं बल्कि एक अधिकार के रूप में स्थापित कर रही है।

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