एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में राजस्व विभाग के एक तहसीलदार पर जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों को भूमिहीन करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
इन आरोपों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके रेसलर ग्रेट खली (दलीप सिंह राणा) ने सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रेट खली ने शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि पांवटा साहिब के सूरतपुर गांव में उनके पिता ने करीब 12 वर्ष पहले एक महिला से 16 बीघा जमीन खरीदी थी। इस जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।
इसके बावजूद संबंधित तहसीलदार ने उक्त जमीन को किसी अन्य व्यक्ति की बताकर खली के दस्तावेजों को गलत करार दे दिया। खली का आरोप है कि इस पूरे मामले में तहसीलदार और एसडीएम की आपसी मिलीभगत है।

खली ने दावा किया कि यह मामला सिर्फ उनकी जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि पांवटा साहिब क्षेत्र में करीब 100 से अधिक लोग इस तरह की कार्रवाई से पीड़ित हैं।
वर्षों से जिन जमीनों पर लोग रहकर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं, उन्हीं जमीनों को एक्स पार्टी या कहीं और की बताकर लोगों को बेदखल किया जा रहा है। पीड़ितों के पास जमीन के वैध कागजात होने के बावजूद उन्हें भूमिहीन बनाया जा रहा है।
रेसलर खली ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी खुद को संविधान से ऊपर समझ रहा है और अल्प समय में करोड़ों रुपये की संपत्ति बना चुका है, जो अपने आप में जांच का विषय है।
उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस तरह की मनमानी पर रोक नहीं लगी, तो आम आदमी का प्रशासन और कानून व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा।
ग्रेट खली ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिलने का समय मांगा है।
खली ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के आदेश देंगे, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी अधिकारी संविधान से ऊपर नहीं है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में आम लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।







