एप्पल न्यूज़, शिमला
गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर शिमला का ऐतिहासिक रिज मैदान जब राष्ट्रभक्ति के रंगों में सराबोर था, तब हिमाचल प्रदेश उद्योग विभाग की झांकी ने न केवल लोगों का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि प्रदेश की औद्योगिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और नवाचार की दिशा को सशक्त स्वर भी दिया।
झांकी के केंद्र में रहा, हाल ही में शिमला में आयोजित हिम एमएसएमई उत्सव 2026, जिसने प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को नई उड़ान दी।
इसका सबसे प्रभावशाली दृश्य था हैंडलूम से निर्मित 4023 हस्तनिर्मित शॉलों का भव्य प्रदर्शन—एक ऐसी उपलब्धि जिसने गिनीज बुक रिकॉर्ड में स्थान पाकर हिमाचल के बुनकरों और कारीगरों को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर दिया।

उद्योग मंत्री श्री हर्षवर्धन चौहान ने झांकी को आत्मनिर्भर हिमाचल की दिशा में एक सशक्त कदम बताया। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प, नवाचार और उद्यमिता के संगम ने यह संदेश दिया है कि प्रदेश की औद्योगिक प्रगति केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर परिणाम दे रही है।
झांकी में उभरते उद्यमों, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्टार्टअप्स और विभाग की प्रमुख उपलब्धियों को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि हिमाचल प्रदेश नवाचार, अवसर और निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।
इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) आर.डी. नजीम ने कहा कि यह झांकी राज्य की औद्योगिक सोच की स्पष्ट झलक है, जहां पारंपरिक कौशल को आधुनिक मंच प्रदान कर स्थानीय उद्यमों को वैश्विक पहचान दिलाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि हिम एमएसएमई उत्सव ने यह सिद्ध किया है कि सही मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग से स्थानीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय सफलता की कहानी बन सकते हैं।
आयुक्त उद्योग डॉ. यूनुस ने कहा कि हिम एमएसएमई उत्सव ने प्रदेश के उद्यमियों को न केवल मंच दिया, बल्कि उनके उत्पादों और विचारों को पहचान भी दिलाई। परंपरा और आधुनिक उद्यमिता का यह संतुलन प्रदेश के औद्योगिक भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
झांकी के माध्यम से यह भी दर्शाया गया कि सीईओ मीट, एक जिला एक उत्पाद पहल, महिला उद्यमिता कार्यक्रम और नवाचार केंद्रित सत्रों ने प्रदेश में निवेश के नए द्वार खोले हैं।
इस संदर्भ में अतिरिक्त निदेशक उद्योग तिलक राज शर्मा ने कहा कि इन पहलों से एक ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है, जो आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
रिज मैदान पर सजी यह झांकी केवल एक प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक आत्मविश्वास, सृजनशीलता और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत चित्र थी—जो यह संदेश दे रही थी कि परंपरा और प्रगति साथ-साथ चलें, तो विकास की राह और भी उजली हो जाती है।







