रामपुर बुशहर का ऐतिहासिक “फाग मेला” देव आगमन के साथ आज से शुरू, 21 देवता होंगे शामिल

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एप्पल न्यूज़, रामपुर बुशहर
शिमला जिला के रामपुर बुशहर में आयोजित होने वाला ऐतिहासिक फाग मेला आज देवागमन के साथ शुरू हो जाएगा। 8 मार्च तक चलने वाला यह चार दिवसीय उत्सव वसंत ऋतु के आगमन और हिंदू नववर्ष के स्वागत के उपलक्ष्य में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

यह मेला मुख्य रूप से ऐतिहासिक पदम पैलेस के राज दरबार प्रांगण में आयोजित होता है, जहां बुशहर रियासत की परंपरा के अनुसार राज परिवार की ओर से देवी-देवताओं का भव्य स्वागत किया जाता है।
फाग मेले की सबसे बड़ी विशेषता ‘देव-मिलन’ की परंपरा है, जो सदियों से चली आ रही है। इस उत्सव की शुरुआत बुशहर रियासत काल में हुई थी और आज भी इसे उसी श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाता है।

मेले के दौरान ऊपरी शिमला और कुल्लू क्षेत्र से आमंत्रित देवी-देवता अपने भव्य रथों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ रामपुर नगर में प्रवेश करते हैं। इस वर्ष मेले में 21 से अधिक स्थानीय देवी-देवता भाग ले रहे हैं, जो पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और रणसिंघों की गूंज के बीच नगर में शोभायात्रा निकालेंगे।
देवी-देवताओं के आगमन के साथ पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह के माहौल में डूब जाता है। देवताओं की शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरती है, जहां श्रद्धालु फूलों और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत करते हैं।

देवता अपने रथों में विराजमान होकर नगरवासियों को आशीर्वाद देते हैं। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं की जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
फाग मेला देव आस्था के साथ-साथ हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति का भी अद्भुत संगम है। चार दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में पारंपरिक पहाड़ी नाटी और विभिन्न लोक नृत्यों का आयोजन किया जाता है।

ग्रामीण पारंपरिक रंग-बिरंगी पोशाकों में सजकर लोक धुनों पर थिरकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन जाता है। पहाड़ी संस्कृति और लोक परंपराओं की झलक इस मेले में स्पष्ट रूप से देखने को मिलती है।
मेले के दौरान शाम के समय सांस्कृतिक संध्याओं का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें प्रदेश के प्रसिद्ध लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं। लोक गीतों, नाटी और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से हिमाचली संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

इन कार्यक्रमों को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग रामपुर पहुंचते हैं।
बुशहर रियासत की परंपरा के अनुसार राज परिवार के सदस्य स्वयं देवताओं का स्वागत करते हैं और इस दौरान राज दरबार प्रांगण में विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न होते हैं।

यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। देव-मिलन के इस अद्भुत अवसर को देखने के लिए हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
फाग मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

सदियों से चली आ रही बुशहर रियासत की यह परंपरा आज भी पूरी आस्था और भव्यता के साथ निभाई जा रही है। आधुनिकता के इस दौर में भी यह मेला अपनी प्राचीन जड़ों, देव आस्था और लोक संस्कृति को जीवित रखे हुए है।
देव संस्कृति, लोक परंपराओं और श्रद्धा का यह अनूठा संगम पूरे क्षेत्र को उत्सव के रंग में रंग देता है और लोगों को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करता है।

यही कारण है कि रामपुर का ऐतिहासिक फाग मेला आज भी हिमाचल की देव संस्कृति और पारंपरिक आस्था का एक अनमोल प्रतीक बना हुआ है।

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