हिमाचल में सोशल मीडिया पत्रकारिता पर लगे लगाम, फर्जी खबरों पर लगे रोक, जवाबदेही के हो स्पष्ट प्रावधान, जिम्मेदार पत्रकारिता को मिले संरक्षण- आर्य

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हिमाचल प्रदेश यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष बोले— पत्रकारों का पंजीकरण हो अनिवार्य: जोगिंद्र देव आर्य

एप्पल न्यूज़, शिमला

हिमाचल प्रदेश यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंद्र देव आर्य ने राज्य सरकार से सोशल मीडिया आधारित पत्रकारिता के लिए अलग एवं प्रभावी नीति बनाने की मांग दोहराते हुए कहा है कि डिजिटल युग में समाचारों के प्रसार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। सोशल मीडिया आज सूचना का सबसे तेज माध्यम बन चुका है, लेकिन इसके साथ फर्जी खबरों, भ्रामक सूचनाओं और गैर-जिम्मेदाराना पत्रकारिता की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में समय की मांग है कि सरकार सोशल मीडिया पत्रकारिता के लिए स्पष्ट नियम, आचार संहिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यापक नीति लागू करे।
जोगिंद्र देव आर्य ने कहा कि हिमाचल प्रदेश यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स पिछले कई वर्षों से इस विषय को सरकार के समक्ष उठाती रही है। उनका कहना है कि जिस प्रकार विभिन्न सरकारी विभागों, संस्थानों और पेशों के लिए निर्धारित नियम एवं मानक बनाए गए हैं, उसी प्रकार पत्रकारिता के क्षेत्र में भी स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पत्रकारों के लिए एक निर्धारित कोड ऑफ कंडक्ट (आचार संहिता) लागू किया जाए तथा प्रत्येक पत्रकार का अनिवार्य पंजीकरण किया जाए। पंजीकरण के बाद उन्हें एक विशिष्ट पहचान संख्या अथवा कोड उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी पहचान प्रमाणित हो सके और समाचारों के प्रति उनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में स्थिति यह बन गई है कि जिसके हाथ में एंड्रॉयड मोबाइल फोन आ जाता है, वह स्वयं को पत्रकार घोषित कर देता है। अनेक लोग बिना किसी तथ्यात्मक जांच और आधिकारिक पुष्टि के समाचार, वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर प्रसारित कर देते हैं। इससे कई बार अफवाहें फैलती हैं, लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है और सामाजिक सौहार्द भी प्रभावित होता है। ऐसे मामलों से वर्षों से निष्पक्ष, जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों की विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार प्रसारित करने का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र का एक मजबूत और महत्वपूर्ण स्तंभ है। समाज, सरकार और जनता के बीच सही एवं तथ्यपरक जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी पत्रकारों पर होती है। इसलिए पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए जवाबदेही, नैतिक मानदंड और व्यावसायिक अनुशासन आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि पत्रकारों का पंजीकरण अनिवार्य होगा और स्पष्ट नियम लागू किए जाएंगे तो पत्रकारिता की विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होगी तथा आम जनता तक प्रमाणिक और संतुलित जानकारी पहुंचेगी।
जोगिंद्र देव आर्य ने सुझाव दिया कि प्रस्तावित सोशल मीडिया पत्रकारिता नीति में पत्रकारों के पंजीकरण, आचार संहिता, प्रशिक्षण, जवाबदेही और फर्जी एवं भ्रामक समाचारों पर प्रभावी नियंत्रण के स्पष्ट प्रावधान शामिल किए जाएं। साथ ही डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े लोगों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि वे पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों, कानूनी प्रावधानों और तथ्य जांच की प्रक्रिया से भली-भांति परिचित हो सकें।
उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पत्रकारों को संरक्षण और सम्मान मिलना चाहिए, जबकि जानबूझकर भ्रामक अथवा असत्य समाचार प्रसारित करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई का भी प्रावधान होना चाहिए। इससे सोशल मीडिया पर समाचारों की गुणवत्ता में सुधार आएगा और जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
प्रदेश अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि राज्य सरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर गंभीरता से विचार करेगी और ऐसी व्यवहारिक एवं प्रभावी नीति तैयार करेगी, जो पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करने के साथ-साथ आम जनता को विश्वसनीय, प्रमाणिक और तथ्यपरक जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स भविष्य में भी इस मांग को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाती रहेगी, ताकि पत्रकारिता की गरिमा, विश्वसनीयता और सामाजिक उत्तरदायित्व को और अधिक सशक्त बनाया जा सके.

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