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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में बड़ा गोलमाल, अपीलीय व्यवस्था, नियुक्तियों और कंसेंट जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल, मांगी निष्पक्ष जांच- जमवाल

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शिमला। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बोर्ड में प्रशासनिक निर्णयों, नियुक्तियों और कंसेंट (अनुमतियां) जारी करने की प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं, जिनका उत्तर प्रदेश सरकार को देना चाहिए।

राकेश जमवाल ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जिस अधिकारी को सदस्य सचिव (मेंबर सेक्रेटरी) की जिम्मेदारी दी गई है, उसी व्यवस्था में अपीलीय प्रक्रिया को भी प्रभावित करने की स्थिति दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में निर्णय लेने वाला अधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी अलग-अलग होने चाहिए, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है और इसकी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड में उद्योगों को जारी होने वाले कंसेंट और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पत्राचार का संचालन भी कुछ चुनिंदा अधिकारियों के माध्यम से किया जा रहा है। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन निर्णयों का अधिकार किसके पास है और क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन नियमों के अनुरूप किया गया है।

राकेश जमवाल ने कहा कि यदि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप है तो सरकार को स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि कहीं प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग या भ्रष्टाचार तो नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि भाजपा की मांग है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में हुई नियुक्तियों, सदस्य सचिव से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों, कंसेंट जारी करने की प्रक्रिया तथा अपीलीय व्यवस्था की विस्तृत जांच कराई जाए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

राकेश जमवाल ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार पारदर्शिता और सुशासन के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन यदि इस प्रकार के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह तथ्यों को सार्वजनिक करे और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। भाजपा प्रदेश के हितों और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए ऐसे मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी।

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