किन्नौर की ऊंची पहाड़ियों पर सीजन की पहली बर्फबारी, बागवानों की बढ़ी चिंता
किन्नौर, 26 सितंबर। जनजातीय जिला किन्नौर के ऊंचाई वाले और भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में शनिवार को मौसम ने करवट ली। कूनोचारंग और छितकुल सहित ऊंचाई वाले इलाकों में सीजन का पहला ताजा हिमपात शुरू हो गया है। देखते ही देखते पहाड़ियां बर्फ की सफेद चादर से ढकने लगीं, जबकि निचले क्षेत्रों में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रहा।
पहली बर्फबारी के साथ ही किन्नौर में सर्दियों के आगमन का एहसास होने लगा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान में गिरावट के चलते ठंड बढ़ गई है। बर्फबारी से जहां क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य निखर उठा है, वहीं मौसम के बदले मिजाज ने स्थानीय लोगों और खासकर बागवानों की चिंता भी बढ़ा दी है।

दरअसल, किन्नौर के कई क्षेत्रों में अभी सेब की तुड़ान, पैकिंग और मंडियों तक परिवहन का काम जारी है। ऐसे में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से सेब की तुड़ान के साथ-साथ सड़क मार्ग से उपज की ढुलाई प्रभावित होने की आशंका है। बागवानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है और वे अपनी सालभर की मेहनत को सुरक्षित मंडियों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
एक ओर जहां किन्नौर की पहाड़ियां बर्फ की सफेद चादर ओढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बागवान मौसम की चुनौती के बीच अपनी फसल को समय पर मंडियों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत-तिब्बत सीमा से सटा किन्नौर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मेहनतकश लोगों के लिए जाना जाता है। यहां मौसम में होने वाला प्रत्येक बदलाव केवल प्राकृतिक नजारा नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और आजीविका से भी सीधे जुड़ा होता है।
शनिवार शाम तक जिले में बारिश और बर्फबारी के कारण किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। प्रशासन और संबंधित विभाग मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने तथा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।




