एप्पल न्यूज़, रामपुर बुशहर
उत्तर भारत की सबसे कठिनतम यात्राओं में शुमार श्रीखंड महादेव यात्रा ज्यूरी के उन्नु महादेव से 13 साल बाद एक बार फिर शुरू होने की उम्मीद पूरी होने जा रही है। यदि सब ठीक रहा तो 1 से 5 सितम्बर तक छड़ी यात्रा श्री खंड महादेव के दर्शनों के लिए शिमला जिला के ज्यूरी -फान्चा- सप्पा भावी होते हुए श्री खंड महादेव पहुंचेगी। इसके लिए सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद एसडीएम रामपुर बुशहर ने एडीएम शिमला से अनुमति मांगी है।
इस यात्रा में साधु संतों के साथ स्थानीय लोग जाते है और पूजा पाठ कर वापिस लौटते हैं। जिसके बाद औपचारिक रूप से भी यात्रा शुरू हो सकती है।
श्री खंड महादेव के लिए दो मुख्य ट्रैक हैं। पहला कुल्लू जिला के निरमन्ड क्षेत्र के देव ढाँक से बागीपुल- जाओं- थाचडु- भीम डवारी – नैन सरोवर- भीम बही होते हुए श्रीखण्ड महादेव पहुँचता है। जबकि दूसरा ट्रैक शिमला जिला में रामपुर बुशहर के ज्यूरी के उन्नू महादेव से 15 बीश क्षेत्र के फान्चा- सप्पा भावी- भीम बही होते हुए जाता है।

दो जिलों के दो अलग – अलग ट्रैक पर राजनीति हावी हुई और ज्यूरी होते हुए दूसरे ट्रैक को साल 2013 में यह कर बन्द कर दिया कि ट्रैक पर यात्रा बेहद खतरनाक है। जबकि यह यात्रा मार्ग कम जोखिम वाला और कम समय में पूर्ण होने वाला था। इस ट्रैक में ज्यूरी से फान्चा तक वाहन योग्य सड़क मार्ग है। वहाँ से श्री खंड महादेव तक 18 से 20 किलो मीटर तक पैदल यात्रा दो दिनों में आसानी से पूर्ण की जा सकती है।
वहीं निरमंड होते हुए पहले मार्ग पर जाओं से श्री खंड महादेव तक लगभग 35 किलोमीटर का ट्रैक पैदल 3 से 5 दिन का समय लगता है। इस रूट में ऊँची खड़ी चढ़ाई ग्लेशीयर व भरे हुए खड्ड नाले, गिरते हुए पहाड़ यात्रा को काफी खतरनाक बना देते है। लगभग हर वर्ष ही इस यात्रा में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है।पिछले साल भी इसी वजह से एक दिन की ही यात्रा हुई। इस बार यात्रा शुरू नहीं हुई। मगर अब प्रशासन फान्चा होते हुए छड़ी यात्रा भेजने की तैयारी कर रहा है।
श्रीखंड महादेव की प्रसिद्ध छड़ी यात्रा को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इंतजामों को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। रामपुर के उपमंडलाधिकारी (नागरिक) ने अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (कानून एवं व्यवस्था), शिमला को पत्र भेजकर प्रस्तावित छड़ी यात्रा के आयोजन की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया है। प्रस्तावित यात्रा 1 से 5 सितंबर तक आयोजित की जानी है।

प्रशासन की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित फांचा-श्रीखंड महादेव तीर्थ/ट्रैकिंग मार्ग का कोई भी हिस्सा अधिसूचित वन्यजीव अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान से होकर नहीं गुजरता। इसलिए इसके लिए वन्यजीव अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान से अलग अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
रामपुर बुशहर एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह ने बताया कि यात्रा के दौरान फांचा स्थित बेस कैंप में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा बीएमओ रामपुर और आईटीबीपी की चिकित्सा टीमें पूरे मार्ग पर तैनात रहेंगी। इन टीमों के पास प्राथमिक उपचार किट, आवश्यक दवाइयां, चिकित्सा सामग्री और ऑक्सीजन की व्यवस्था रहेगी।
यात्रियों की सुविधा के लिए स्पा भावी और माजबौन में दो हॉल्ट स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। दोनों स्थानों पर प्राकृतिक पेयजल स्रोत उपलब्ध हैं, जबकि यात्रियों को पर्याप्त पानी साथ रखने की सलाह दी जाएगी। स्थानीय समुदाय और उन्नू महादेव मंदिर समिति की ओर से दोनों पड़ावों पर लंगर एवं भोजन की व्यवस्था की जाएगी।

आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस, आईटीबीपी और वन विभाग की टीमें बेस कैंप सहित मार्ग पर तैनात रहेंगी। किसी दुर्घटना, चोट या खराब मौसम की स्थिति में तत्काल खोज एवं बचाव तथा प्रभावित यात्री को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था की जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण को भी योजना में विशेष महत्व दिया गया है। यात्रियों को स्थानीय वनस्पति और जीव-जंतुओं को नुकसान न पहुंचाने तथा ‘लीव नो ट्रेस’ व्यवस्था का पालन करने के निर्देश दिए जाएंगे। पड़ावों पर डस्टबिन लगाए जाएंगे और वन विभाग व स्थानीय स्वयंसेवकों द्वारा मार्ग की सफाई की जाएगी। यात्रा के बाद मार्ग का निरीक्षण कर पारिस्थितिक क्षति का आकलन और आवश्यक पुनर्स्थापना कार्य भी किए जाएंगे।
प्रशासन ने यात्रा के साथ श्रीखंड ट्रैकिंग रूट के विकास की संभावनाओं का भी जमीनी आकलन करने का निर्णय लिया है। ट्रेक की दूरी, ऊंचाई, कठिनाई स्तर, पानी, कैंपिंग, चिकित्सा, संचार, साइन बोर्ड, रेस्क्यू प्वाइंट और अन्य सुविधाओं का सर्वे कर पर्यटन विभाग को व्यापक विकास प्रस्ताव भेजा जाएगा।









