“श्रीखण्ड यात्रा” पर रोक-भक्तों को यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं, प्रशासन ने यात्रा बेस कैंप ‘सिंहगाड’ में तैनात किए पुलिस कर्मी

उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग  बोले सरकार के आगामी निर्देशों तक यात्रा पर रहेगी रोक कोरोना महामारी के चलते किसी को यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं

एप्पल न्यूज़, सीआर शर्मा आनी

कुल्लू जिला के आनी उपमण्डल में निरमण्ड क्षेत्र के अंतर्गत 18570 फुट की ऊंचाई पर स्थित उतर भारत की सबसे कठिनतम धार्मिक यात्रा श्रीखंड पर प्रशासन ने इस वर्ष भी कोरोना महामारी के दृष्टिगत रोक लगा दी है।

उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट के अधीन 15 जुलाई से 25 जुलाई तक चलने बाली श्रीखंड यात्रा को कोरोना महामारी के मद्देनजर इस वर्ष भी रोका गया है।

उन्होंने कहा कि इस यात्रा पर समूचे भारतवर्ष से हर वर्ष हजारों शिव भक्त महादेव के दर्शनों को निकलते हैं। गत वर्ष कोरोना महामारी के चलते इस धार्मिक यात्रा पर पूर्णतयः रोक लगाई गई थी.जो इस वर्ष भी महामारी से बचाव के दृष्टिगत बंद रहेगी।

उपायुक्त ने कहा कि प्रशासन फिलहाल यात्रा को लेकर किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहता।क्योंकि कोरोना महामारी का प्रकोप अभी तक पूरी तरह से थमा नहीं है। इसलिए इस सम्बंध में सरकार द्वारा जारी आगामी निर्देशों तक श्रीखंड यात्रा पर पूर्णतयः रोक रहेगी।

वहीं इस सम्बंध में श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष एवम एसडीएम आनी चेतसिंह ने बताया कि आगामी 15 जुलाई से शुरू होने बाली श्रीखंड कैलाश यात्रा पर इस वर्ष भी उपायुक्त कुल्लू के निर्देशानुसार रोक रहेगी, जिसके अंतर्गत यात्रा पर किसी भी भक्त को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिसके लिए प्रशासन ने यात्रा के बेस कैम्प सिंहगाड में पुलिस बल तैनात कर दिया है।

एसडीएम ने कहा कि बाबजूद इसके यदि कोई यात्री सरकारी आदेशों की अवहेलना कर, ज़बरन यात्रा पर निकलता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

बहरहाल हिमाचल प्रदेश सहित समूचे भारतवर्ष से श्रीखंड कैलाश के दर्शनों को आने वाले शिव भक्तों को गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी भोले के दर्शनों से महरूम रहना पड़ेगा।

बता दें कि समुद्रतल से 18570 फुट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड कैलाश की यात्रा उतरी भारत की सबसे कठिनतम धार्मिक यात्रा है, जिसमें भक्तों को 32 किमी का कठिन व ग्लेशियरयुक्त

मार्ग पैदल तय करना पड़ता है और यात्रा में ऊँचाईं पर आक्सीजन की कमी भी रहती है। बाबजूद इसके भोले के दर्शन को भक्तों का साहस कम नहीं होता। यह यात्रा प्रतिवर्ष 15 जुलाई से प्रशासन की देखरेख में शुरू की जाती है।

यात्रा के लिए भक्त शिमला से रामपुर होते हुए “एशिया के सबसे बड़े गांव निरमण्ड”पहुँचते हैं। जहां माता अम्बिका और भगवान परशुराम के दर्शनों के बाद भक्त सड़क मार्ग से वाहन द्वारा यात्रा के बेस कैंप सिंहगाड वाया बागीपुल जाओं होकर पहुंचते हैं।

यात्रा में भक्तों ब श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हालांकि प्रशासन द्वारा हर प्रकार की व्यवस्था की जाती है मगर इसके इसके अलावा श्रीखंड सेबादल व सेवा समितियां भी भक्तों के लिए खाने पीने ब रहने सहने की सेवा में सेवारत रहती हैं।

यात्रा पर गत वर्ष की भांति  इस वर्ष भी कोरोना महामारी के चलते रोक लगने से शिव भक्तों को निराशा हाथ लगी है।

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