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“समाज में लिंग संवेदनशीलता के प्रसार में HPU व महिला आयोग मिलकर करेंगे कार्य”- महावीर

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कुलपति, आचार्य महावीर सिंह ने सभी से मिलकर काम करने का आह्वान किया

एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में आज आंतरिक गुणवत्ता एवं विश्वनीयता परकोष्ठ (IQAC) द्वारा “समाज में लिंग संवेदनशीलता के प्रसार में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

इसका उद्देश्य समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना है। इस संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति, आचार्य महावीर ने की|
अपने संबोधन में कुलपति ने कहा कि हम सौभाग्य शाली हैं कि प्रदेश के साथ विश्वविद्यलय में लैंगिक समानता में हमारे समाज में जागरूकता है, परन्तु फिर भी अभी इस पर और काम करने की आवशकता है।

उन्होंने कहा कि लिंग संवेदनशीलता एक ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्तियों को लैंगिक मुद्दों के प्रति जागरूक करती है और सकारात्मक सोच व व्यवहार में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करती है। यह एक समावेशी, न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण की नींव है।
कुलपति ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान पाठ्यक्रम, जागरूकता कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और लिंग संवेदनशीलता प्रकोष्ठों के माध्यम से युवाओं की सोच को आकार देते हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान अनुसंधान, संवाद और जागरूकता के मंच के रूप में भी कार्य करते हैं, जिससे छात्र-छात्राएं और कर्मचारी लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनते हैं।
आचार्य महावीर सिंह ने महिला आयोग की अध्यक्ष सुश्री विद्या नेगी को आश्वस्त किया कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय महिला आयोग के साथ इस विषय पर मिलकर काम करेगा और समाज में इन चुनौतियों को निपटने के लिए जागरूक करेगा|
इस से पूर्व महिला आयोग की अध्यक्ष, सुश्री विद्या नेगी ने कहा कि अभी भी हमारे समाज में ऐसी परम्पराएँ हैं जिसमें महिलाओं के लिए अलग कायदे और कानून तय कर रखे हैं जिनको मूल रूप से ख़त्म करना एक चुनौती है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक, घरेलु गतिविधियों में जेंडर इक्वलिटी में ज़मीनी बदलाव लाने की ज़रुरत है ताकि लैंगिक समानता बनाई जा सके।

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि इस तरह के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को लैंगिक समानता के बारे में पढ़ा जाये ताकि यह छात्र समाज को जागरूक कर सकें।

उन्होंने कहा कि उच्च संस्थानों की भूमिका समाज में बदलाव लाने के लिए बहुत ही महत्वपूरण है और महिला आयोग विश्वविद्यालय के साथ इस तरह के और भी कार्यक्रम विश्वविद्यालय के अन्दर और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में मिल कर कार्य करेगा|
इस अवसर पर अधिष्ठाता अध्ययन आचार्य बी के शिवराम, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, आचार्य ममता मोक्टा, महिला एवं बाल आयोग शिमला की अध्यक्ष श्रीमती संतोष शर्मा, आचार्य अपर्णा नेगी, निदेशक महिला एवं विकास केंद्, अधिष्ठाता योजना आचार्य जोगिन्द्र धीमान, अधिष्ठाता महाविद्यालय विकास परिषद् आचार्य हरी मोहन, निदेशक (IQAC) एवं इस संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. रमेश ठाकुर, कई अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, प्रध्यापक, गैर शिक्षक कर्मचारी तथा विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।

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