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राष्ट्रीय किसान कांग्रेस के सचिव कंवर रविंदर सिंह ने केंद्र सरकार के सेब को लेकर न्यूज़ीलैंड के साथ किये गये फ़्री ट्रेड समझौते की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि ये हिमाचल प्रदेश के बागवानों के साथ विश्वासघात है। जिस प्रकार केंद्र सरकार ने न्यूज़ीलैंड के सेब पर आयात शुल्क 50% से 25% करने का जो निर्णय लिया है इससे हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी पर विपरीत असर पड़ेगा।
क्योंकि सेब हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी में 5 हज़ार करोड़ का महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। सेब हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी का ही नहीं बल्कि रोज़गार,व्यापार, व्यवसाय, बाग़वानी और आय का सबसे बड़ा स्रोत है।
बाहरी देशों से आने वाले सेब पर आयात शुल्क कम करने से हिमाचल के सेब को मंडियों में और कम मूल्य मिलेगा।जिससे कि हिमाचल प्रदेश के किसान एवं बागवान की आय पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। 6 साल के लिए सरकार के द्वारा किया गया यह समझौता बागवानो की आर्थिक स्थिति बद से बदतर करेगा।

केंद्र सरकार का ये आयात शुल्क घटाने का निर्णय निंदनीय ही नहीं बल्कि अनुचित है। न्यूज़ीलैंड के सेब की खपत भारतीय बाज़ारों में जिस प्रकार कम आयात शुल्क के साथ जिस प्रकार 32500 टन से 45000 टन की जानी है इससे भारत में उगाए जाने वाले सेब की क़ीमत और माँग अपने ही बाज़ार में घटेगी।
न्यूज़ीलैंड और बाहरी देशों से आने वाला सेब वहाँ की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ज़्यादा ठोस और लंबे समय तक उपयोग करने योग्य होता है इसका भारतीय सेब मुक़ाबला नहीं कर सकता है।
केंद्र सरकार को अपना यह निर्णय तुरंत प्रभाव से वापस लेना चाहिए।क्योंकि ये निर्णय अपने देश के किसानों के साथ ना की एक अन्याय है बल्की हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों की तो कमर ही तोड़ देगा।
आज जहाँ एक और अमेरिका जैसे राष्ट्र अपने देश के किसानों, बागवानों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों, मज़दूरों सभी के हितों की रक्षा के लिये पूरे विश्व में दूसरे देशों के साथ लड़ रहे है.
वहीं दूसरी ओर भारत के द्वारा न्यूज़ीलैंड के साथ मैं किया गया ये फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट अपने ही लोगों के साथ किया गया धोखा है जो अपने ही देश के बाज़ार में उनके हक छीनता है।
कवर रविंदर सिंह ने यह भी कहा कि यदि केंद्र सरकार इस फ़ैसले को वापस नहीं लेती तो किसान कांग्रेस पहले इसका विरोध राज्यपाल को ज्ञापन सौंपे कर करेगी और आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों के हितों के लिए यदि सड़कों पर आंदोलन करना पड़ा तो उसे करने से भी पीछे नहीं रहेगी।







