अरसू स्कूल में पहली बार भव्य पूर्व छात्र मिलन, 52 वर्षों के टॉपर्स होंगे सम्मानित
एप्पल न्यूज़, अरसू/निरमंड
राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, अरसू के इतिहास में 29 दिसंबर 2025 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। विद्यालय में पहली बार भव्य पूर्व छात्र मिलन (ग्रैंड एलुमनी मीट) का आयोजन किया जा रहा है, जिसे वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह के साथ जोड़ा गया है।
यह आयोजन न केवल विद्यालय की 200 वर्ष से अधिक की शैक्षणिक विरासत का उत्सव है, बल्कि पीढ़ियों के बीच भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव को भी सुदृढ़ करेगा।
इस ऐतिहासिक अवसर पर हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे, जबकि हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर विशिष्ट अतिथि होंगे।
स्कूल के प्रधानाचार्य योग ठाकुर ने बताया कि कार्यक्रम में विद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों को “सुपर एलुमनी” की उपाधि देकर सम्मानित किया जाएगा।

1973 से अब तक के टॉपर्स का सम्मान
समारोह की सबसे खास बात यह है कि वर्ष 1973 से लेकर वर्तमान तक कक्षा 10वीं और 12वीं के सभी मेधावी टॉपर छात्र-छात्राओं को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त विद्यालय के वरिष्ठतम जीवित पूर्व छात्र को विशेष सम्मान देकर शिक्षा की निरंतरता और परंपरा का संदेश दिया जाएगा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रेरक वातावरण
कार्यक्रम के दौरान वर्तमान विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो विद्यालय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और छात्र-प्रतिभा को मंच प्रदान करेंगी। यह आयोजन विद्यार्थियों, अभिभावकों और पूर्व छात्रों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।
पूर्व छात्र संघ के भविष्य के संचालन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्रधानाचार्य योग ठाकुर की अध्यक्षता में एक मेगा बैठक आयोजित की गई, जिसमें 109 सुपर एलुमनी सदस्यों सहित विभिन्न सामाजिक वर्गों—ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, स्थानीय व्यापार संघ सदस्य—के लगभग 30 लोगों ने सक्रिय भागीदारी की। बैठक में एलुमनी एक्जीक्यूटिव कमेटी (AEC) का गठन किया गया।
एलुमनी एक्जीक्यूटिव कमेटी में लोक राज ठाकुर – अध्यक्ष, योग ठाकुर (प्रधानाचार्य) – सचिव, कैलाश शर्मा – सह-सचिव, सतीश अग्रवाल – सदस्य, रोशन शर्मा – सदस्य, एम.एल. बंसल – सदस्य, एडवोकेट गोपाल कश्यप – सदस्य, एम.एस. वर्मा (ओटी) – सदस्य, टी.आर. शर्मा – सदस्य बनाए गए हैं।

विद्यालय प्रबंधन का आमंत्रण
विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं समस्त स्टाफ ने क्षेत्र के सभी पूर्व छात्रों, अभिभावकों और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की है कि वे इस गौरवमयी आयोजन में सहभागी बनें। उनका कहना है कि यह मंच पुरानी यादों को ताजा करने, अनुभव साझा करने और विद्यालय के उज्ज्वल भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का अवसर प्रदान करेगा।
पूर्व छात्र मिलन के माध्यम से विद्यालय और समाज के बीच मजबूत, स्थायी और सक्रिय संबंध स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही है—जो शिक्षा, सेवा और संस्कारों की साझा विरासत को आगे बढ़ाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
निरमंड अरसू क्षेत्र के लिए यह वर्ष ऐतिहासिक है, क्योंकि यहां की शिक्षा परंपरा ने 200 वर्ष पूरे कर लिए हैं। समय के साथ-साथ अर्सु स्कूल ने अनौपचारिक पाठशाला से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बनने तक का लंबा और प्रेरणादायक सफर तय किया है।
करीब 200 वर्ष पूर्व 1823 में भारत में बृतानिया हुकूमत ने वर्नाकुलर स्कुलिंग शुरू हुई थी। 1825 में तत्कालीन पंजाब के अधीन आने वाली कांगड़ा रियासत में उस समय कुल चार स्कूल खोले गए थे जिसमें निरमंड क्षेत्र के अरसू में एक वर्नाकुलर (स्थानीय भाषा) स्कूल की स्थापना हुई थी।
इसे उस समय प्राथमिक पाठशाला/इंफॉर्मल स्कूल के रूप में जाना जाता था। हालांकि इस आरंभिक दौर के लिखित रिकॉर्ड आज उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन स्थानीय परंपराएं और ऐतिहासिक संदर्भ इसकी पुष्टि करते हैं।

1863 में अरसू में फॉर्मल एजुकेशन की औपचारिक शुरुआत हुई। यहीं से संगठित पाठ्यक्रम और नियमित शिक्षण व्यवस्था ने आकार लिया।
प्राथमिक विद्यालय का स्वरूप (1923):
1923 में स्कूल को विधिवत प्राथमिक विद्यालय का दर्जा मिला, जिससे क्षेत्र में बुनियादी शिक्षा को मजबूती मिली।
मिडल स्कूल और प्लेटिनम जुबली (1956):
1956 में अर्सु स्कूल पंजाब के अधीन मिडल स्कूल बना। इस स्तर तक पहुंचने के 70 वर्ष पूरे होने पर विद्यालय ने प्लेटिनम जुबली मनाई जा रही है। यह उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति का प्रतीक है।
हाई स्कूल और गोल्डन जुबली (1972):
1972 में स्कूल हाई स्कूल बना। इस अवसर पर गोल्डन जुबली का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यालय के पहले छात्र गोविंद प्रसाद की उपस्थिति विशेष आकर्षण रहेगी—यह पीढ़ियों के बीच शिक्षा की निरंतरता को दर्शाता है।
वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (1989):
अंततः 1989 में अर्सु स्कूल को वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ, जिससे विद्यार्थियों को उच्चतर शिक्षा की सुविधा अपने ही क्षेत्र में मिलने लगी।
प्रधानाचार्य योग ठाकुर का कहना है कि वर्तमान में वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अरसू की 200 साल की यात्रा न केवल एक संस्थान का इतिहास है, बल्कि यह क्षेत्र की सामाजिक-शैक्षिक चेतना, समर्पित शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत का सजीव प्रमाण भी है। यह विद्यालय आज भी नई पीढ़ी को ज्ञान, संस्कार और अवसर प्रदान करने की अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।







