“जब मुख्यमंत्री ने फिर से जांच का आश्वासन दे दिया था तो हड़ताल क्यों”, तुरन्त IGMC शिमला के रेजिडेंट डॉक्टरों ने “हड़ताल” वापस ली

एप्पल न्यूज़, शिमला

दिल्ली से लौटते ही मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सख्त ब्यान दिया और कहा कि जब दिल्ली जाने से पहले डॉक्टरों के साथ वार्ता में प्रदेश के मुखिया खुद मुख्यमंत्री ने मामले की फिर से जांच करने का आश्वासन दे दर था तो फिर रेजिडेंट डॉक्टरों का हड़ताल पर जाने का का औचित्य था।

इससे जाहिर होता है कि डॉक्टरों को सरकार पर भरोसा नही। ये बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। अभी भी समय है डॉक्टर हड़ताल वापस लें और स्वास्थय सेवाएं सुचारु रखें। itna कहना था कि डॉक्टरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। क्योंकि नियमों के अनुसार ये हड़ताल पूरी तरह से गलत थी। तुरन्त डॉक्टरों ने बैठक की और हड़ताल वापस ले ली। अब कल से नियमित सेवाएं शुरू हो जायेंगी।


इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला के रेजिडेंट डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश से मिले आश्वासन के बाद अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल तत्काल प्रभाव से वापस लेने का निर्णय लिया है।
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) IGMC शिमला के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 28 दिसंबर 2025 को संगठन को आश्वासन दिया कि संबंधित मामले की विस्तृत जांच शुरू की जाएगी और डॉ. राघव नरूला की सेवा समाप्ति को रद्द करने पर विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के इस आश्वासन पर विश्वास जताते हुए RDA ने जनहित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल समाप्त कर दी है।
RDA ने स्पष्ट किया है कि वह पूरी तरह से इस जांच प्रक्रिया में शामिल रहेगी और जब तक सेवा समाप्ति आदेश रद्द नहीं होते, तब तक मामले पर नजर रखी जाएगी।

इस विषय में आगे की रणनीति को लेकर 03 जनवरी 2026 को बैठक आयोजित की जाएगी।
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने प्रदेश एवं देश भर के रेजिडेंट डॉक्टर संगठनों, हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन, SAMDCOT, मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन तथा अन्य सभी संगठनों का इस आंदोलन में सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है।

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