IMG_20260124_200231
previous arrow
next arrow

RDG बंद होना नई बात नहीं, “वर्षों पहले तय था”, सरकार ने समय रहते योजना क्यों नहीं बनाई..?” प्रो. PK धूमल

IMG_20251207_105330
previous arrow
next arrow

“आर्थिक संकट का समाधान भाषण नहीं, सख्त वित्तीय अनुशासन और खर्चों में कटौती से होगा”

एप्पल न्यूज़, शिमला

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल में जो वित्तीय संकट की चर्चा हो रही है, वह अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है, बल्कि इसके संकेत वर्षों पहले ही स्पष्ट हो चुके थे।

उन्होंने कहा कि आरडीजी (Revenue Deficit Grant) के चरणबद्ध समाप्त होने की जानकारी पहले से थी, इसके बावजूद सरकार ने समय रहते वैकल्पिक संसाधन जुटाने और वित्तीय प्रबंधन की ठोस योजना नहीं बनाई।
प्रो. धूमल ने कहा कि वित्त आयोग की रिपोर्ट में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि 31 मार्च 2026 के बाद आरडीजी समाप्त हो जाएगी। यह कोई नई घोषणा नहीं है। जब यह बात वर्षों पहले से ज्ञात थी, तो सरकार को उसी अनुसार अपनी नीतियां, खर्च और आय के स्रोत तय करने चाहिए थे।

वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना केंद्र सरकार का दायित्व होता है, इसलिए इस विषय पर भ्रम फैलाने के बजाय राज्य सरकार को अपनी तैयारी पर जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट हर संसाधन-सीमित राज्य में आता है, लेकिन समझदारी यह है कि उससे निपटने के लिए समय पर कठोर निर्णय लिए जाएं।

अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी कठिन आर्थिक परिस्थितियां आईं, तब सरकार ने बचत और वित्तीय अनुशासन का रास्ता अपनाया।

मुख्यमंत्री और मंत्रियों के खर्चों पर नियंत्रण लगाया गया, अनावश्यक यात्रा और सुविधाओं में कटौती की गई। उन्होंने स्वयं उदाहरण देते हुए कहा कि वे निजी यात्राओं में भी राज्य पर बोझ नहीं डालते थे और सादगी से कार्य करते थे।
प्रो. धूमल ने कहा कि उनकी सरकार ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में सुधार कर आय बढ़ाने पर जोर दिया। सब्ज़ी उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देकर जहां पहले लगभग 250 करोड़ का कारोबार होता था, उसे बढ़ाकर लगभग 2250 करोड़ तक पहुंचाया गया।

सेब उत्पादन में आई गिरावट की भरपाई वैकल्पिक कृषि से की गई, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय सुधार हुआ और बजट संतुलन में मदद मिली।
उन्होंने वर्तमान सरकार पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर आर्थिक संकट की बात की जा रही है, दूसरी ओर बड़ी संख्या में चेयरमैन, सलाहकार और पदाधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जिन पर भारी खर्च हो रहा है।

नई गाड़ियों की खरीद, अतिरिक्त स्टाफ और सुविधाओं पर व्यय — यह सब वित्तीय अनुशासन के विपरीत है। यदि सचमुच स्थिति कठिन है तो सबसे पहले गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य संबंधों को लेकर भी तथ्य स्पष्ट होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब-जब केंद्र में भाजपा सरकार रही है, हिमाचल को विशेष सहयोग मिला है — चाहे औद्योगिक पैकेज हो या विशेष श्रेणी राज्य का लाभ।

केवल राजनीतिक बयानबाज़ी से आर्थिक स्थिति नहीं सुधरती, उसके लिए ठोस नीति, संसाधन सृजन और व्यय नियंत्रण आवश्यक है।
अंत में प्रो. धूमल ने कहा कि प्रदेश का मुखिया यदि बार-बार यह कहे कि खजाना खाली है, तो इससे जनविश्वास कमजोर होता है।

आवश्यकता इस बात की है कि सरकार ठोस कदम उठाए, खर्चों की समीक्षा करे, प्राथमिकताएं तय करे और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाए। आर्थिक चुनौतियों का समाधान जिम्मेदार निर्णयों और अनुशासित शासन से ही संभव है।

Share from A4appleNews:

Next Post

RDG बंद करना हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’- राजेश धर्माणी

Tue Feb 10 , 2026
एप्पल न्यूज़, शिमला कांग्रेस विधायक एवं वरिष्ठ नेता राजेश धर्माणी ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी पर कड़ा रुख अपनाते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सियासत करने से किसी भी प्रकार का समाधान नहीं निकलने वाला, बल्कि इससे […]

You May Like

Breaking News