एप्पल न्यूज़, शिमला
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार को विधायक क्षेत्र विकास निधि (MLA LAD) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के हंगामे के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि विधायक क्षेत्र विकास निधि की 1.10 करोड़ रुपये की शेष दो किस्तें 31 मार्च से पहले जारी कर दी जाएंगी।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार विधायक ऐच्छिक निधि जारी करने पर भी विचार करेगी।
महिला मंडलों को राशि पर उठा सवाल
विधायक प्रकाश राणा के मूल प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में विधायक क्षेत्र विकास निधि जारी करने के स्वरूप को लेकर विपक्ष के नेताओं से चर्चा की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक प्रकाश राणा ने नियमों की अनदेखी करते हुए निधि की अधिकांश राशि महिला मंडलों को वितरित कर दी।

नियमों के अनुसार कुल राशि का केवल 10 प्रतिशत ही महिला मंडलों को दिया जा सकता है, जबकि राणा द्वारा 543 महिला मंडलों को निधि जारी की गई।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिला मंडलों को सहायता दी जा सकती है, लेकिन तय सीमा के भीतर। उन्होंने विधायकों को सलाह दी कि वे निधि का उपयोग पूंजीगत कार्यों—जैसे सड़क, भवन, सामुदायिक ढांचे—पर करें, ताकि प्रदेश की जीएसडीपी में भी वृद्धि हो सके।
विपक्ष का सरकार पर हमला
विधायक प्रकाश राणा ने प्रतिपूरक प्रश्न के माध्यम से सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधायक क्षेत्र विकास निधि को बंद कर विधायकों को “शून्य” कर दिया गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बजट में निधि का प्रावधान है तो राशि क्यों जारी नहीं की जा रही।
वहीं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि विधायक क्षेत्र विकास निधि की राशि विधानसभा द्वारा पारित बजट का हिस्सा है और इसे समाप्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने सरकार से तुरंत राशि जारी करने की मांग की। ठाकुर ने तर्क दिया कि विधायक इस निधि का उपयोग व्यक्तिगत नहीं बल्कि क्षेत्रीय विकास कार्यों के लिए करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं एक साथ 600 महिला मंडलों को 20-20 हजार रुपये वितरित करते हैं, तो क्या उससे स्थायी संपत्ति (एसेट) का निर्माण होता है?
उन्होंने आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों और अन्य विकास कार्यों के लिए की गई घोषणाओं हेतु भी निधि जारी करने की मांग दोहराई।
विधायक क्षेत्र विकास निधि को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद स्पष्ट हैं। जहां सरकार निधि के उपयोग में पारदर्शिता और पूंजीगत निवेश पर जोर दे रही है।
वहीं विपक्ष बजट प्रावधान के अनुसार राशि जारी करने और विधायकों की भूमिका को प्रभावी बनाए रखने की मांग कर रहा है। अब सभी की नजर 31 मार्च से पहले शेष किस्तों की वास्तविक रिहाई पर टिकी है।






