एप्पल न्यूज़, रामपुर बुशहर
रामपुर बुशहर वन मंडल की सतर्कता से is वर्ष वनाग्नि प्रभावित क्षेत्र में 70% की कमी आई है। इस दौरान दुर्गम पहाड़ियों में भी स्थानीय लोगों की सहायता से आग पर काबू पाया गया है।
Chandulal B Tashildar, वन संरक्षक, रामपुर ने जारी सूखे के बीच जंगलों में लगी आग से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। साथ ही DFO गुरहर्ष सिंह भी मौके पर रहे।
प्रभावित क्षेत्र में कमी और प्लांटेशन सुरक्षा: फ्रंटलाइन स्टाफ और ‘वन मित्रों’ के गहन जागरूकता अभियानों व सुरक्षा प्रयासों के कारण प्रभावित क्षेत्र पिछले वर्ष के 908 हेक्टेयर से घटकर इस वर्ष 272 हेक्टेयर रह गया है।
दरशाल और अन्य दुर्गम क्षेत्रों में सफलता: खनोतूह़ार, राहणूधार और बालटीधार जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है।

विशेष रूप से दरशाल क्षेत्र में खड़ी ढलान और तेज हवाओं के कारण जलते हुए चील के कोण (Pine Cones) बार-बार नीचे लुढ़कते रहे, जिससे आग पुनः सुलगती रही।
इन विकट परिस्थितियों के बावजूद, विभागीय टीम और कुछ स्थानीय निवासियों ने अटूट साहस दिखाते हुए तीन दिनों तक निरंतर प्रयास जारी रखे और अंततः आग पर सफलतापूर्वक काबू पाया।
प्रशासनिक समन्वय: वनाग्नि की रोकथाम हेतु एसडीएम रामपुर के सक्रिय सहयोग से पहली बार खेतों में सेब के अवशेष जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध के आदेश जारी करवाए गए हैं।

वन विभाग का स्टाफ इस आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए निरंतर क्षेत्र में कार्य कर रहा है। इसके साथ ही जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु घासणी (Ghaasni) उपयोगकर्ताओं और पशुपालकों का डेटाबेस भी तैयार किया जा रहा है।
अभी तक प्राप्त परिणाम उत्साहजनक हैं और विभाग वन संपदा की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वनों को सुरक्षित रखने के इस साझा अभियान में हम समस्त नागरिकों और स्थानीय समुदायों से और अधिक सक्रिय सहयोग की अपील करते हैं, ताकि इस प्राकृतिक धरोहर को मिलकर बचाया जा सके।
सूखे के बीच आग प्रभावित क्षेत्रों का दौरा, वन विभाग के प्रयासों को मिला स्थानीय सहयोग
Chandulal B Tashildar, वन संरक्षक, रामपुर ने जारी सूखे के बीच जंगलों में लगी आग से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से मौके पर स्थिति की जानकारी ली और वनाग्नि नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

साथ ही उन्होंने भविष्य में और अधिक सुदृढ़ एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि सूखे के दौरान आग की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
इस दौरान उन्होंने फील्ड स्टाफ का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से ही वन संपदा की रक्षा संभव है।
वनाग्नि से निपटने में स्थानीय लोगों का भी सराहनीय योगदान रहा। दरशल क्षेत्र में मुश्ताक और अब्दुल ने विभाग की टीम का सक्रिय सहयोग किया।
वहीं देवठी क्षेत्र में बुद्धि चंद, यशवंत और नरेंद्र कुमार ने आग बुझाने के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वन विभाग ने इन सभी स्थानीय सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामुदायिक भागीदारी से ही वन संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिलती है।
विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे जंगलों में आग न लगाएं और किसी भी आग की घटना की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।






