IMG_20260124_200231
previous arrow
next arrow

नगर निगम शिमला के बजट में भाजपा पार्षदों का हंगामा, ​मेयर के पास जब पद नहीं तो बजट कैसे पेश किया, मेयर बोले- “हलवा दबाकर कैसा वॉकआउट”..?

IMG_20251207_105330
previous arrow
next arrow

एप्पल न्यूज़, शिमला

नगर निगम शिमला वर्ष 2026-27 के लिए आज वार्षिक बजट पेश कर रहा है, लेकिन बजट से ठीक पहले नगर निगम सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला। भाजपा पार्षदों ने मेयर के अधिकारों पर सवाल उठाते हुए बजट का बहिष्कार कर दिया।

भाजपा पार्षदों का आरोप है कि मेयर का ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है और कार्यकाल बढ़ाने से संबंधित एक्ट अभी कानून का रूप नहीं ले पाया है। उनका कहना है कि इस प्रस्ताव पर राज्यपाल की स्वीकृति नहीं मिली है और मामला न्यायालय में लंबित है।

ऐसे में मौजूदा मेयर द्वारा बजट पेश करना पूरी तरह से अवैध है। पार्षदों ने कहा कि जब कार्यकाल ही समाप्त हो चुका है तो मेयर किस अधिकार से बजट प्रस्तुत कर रहे हैं।

उन्होंने इसे नगर निगम शिमला और प्रदेश सरकार की “दादागिरी” करार दिया। भाजपा पार्षदों ने विरोधस्वरूप सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया और बजट प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

​मेयर के पास पद नहीं तो बजट कैसे किया पेश? शिमला में पार्षदों ने खोला मोर्चा, बजट का किया विरोध डीसी को सौम्पा ज्ञापन

​शिमला नगर निगम में मेयर के खिलाफ बीजेपी पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। एक तरफ मेयर सुरेन्द्र चौहान बजट पेश कर रहे हैं वंही बीजेपी पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त (DC) को ज्ञापन सौंपकर मेयर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

मीडिया से बात करते हुए बीजेपी सरोज ठाकुर ने कहा कि मेयर पद को लेकर जारी अध्यादेश 6 जनवरी को ही समाप्त हो चुका है, जिसके बाद उनके पास हाउस की अध्यक्षता करने की कोई संवैधानिक शक्ति नहीं बची है।
​पार्षदों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि जब मेयर के पास संवैधानिक पद ही नहीं है, तो वे बजट जैसा महत्वपूर्ण दस्तावेज कैसे पेश कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर वे खुद याचिकाकर्ता (Petitioner) के तौर पर 6 तारीख को ही कोर्ट जा चुके हैं।

पार्षदों का कहना है कि मेयर को नैतिकता के आधार पर खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। उन्होंने डीसी को अपनी इन सभी समस्याओं से अवगत कराते हुए इस पूरी प्रक्रिया का पुरजोर विरोध किया है।

उधर, इस पूरे एपिसोड में मेयर सुरेन्द्र चौहान ने कहा कि हलवा तो सबने दबाकर खाया और फ़िर वॉकआउट करने लगे है, कमाल है. कहते हैं मामला कोर्ट में है तो फ़िर बैठकों में भी क्यों आ रहे हैं. फैसला तो आने दो.

उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ शिमला का नहीं प्रदेश के सभी नगर निगमों का है. सरकार ने कुछ सोचकर ही निर्णय लिया होगा. आज के घटनाक्रम ने जता दिया है कि भाजपा शहर के विकास के लिए कितनी संजीदा है.

Share from A4appleNews:

You May Like

Breaking News