दवा उद्योग पर धब्बा – हिमाचल में 44 कंपनियों की बनी 64 दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल, 3 दवा बैच नकली घोषित

प्रदेश में बनी 64 दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल, तीन दवा बैच नकली घोषित
शिमला। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की अगस्त माह की ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश की 44 फार्मा कंपनियों में निर्मित 64 दवाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। इसके अतिरिक्त राज्य में निर्मित तीन दवा बैचों को नकली घोषित किया गया है। देशभर में कुल 221 दवा एवं संबंधित उत्पाद गुणवत्ता जांच में अधोमानक पाए गए हैं, जबकि छह दवाओं को नकली घोषित किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल में गुणवत्ता जांच में फेल हुई दवाओं में सबसे अधिक 30 दवाएं बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) औद्योगिक क्षेत्र में निर्मित हैं। इसके अलावा कालाअंब की 17, पांवटा साहिब की सात, सोलन जिले के अन्य क्षेत्रों की तीन, ऊना की चार, कांगड़ा की दो तथा बिलासपुर की एक दवा गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी। अधोमानक पाई गई दवाओं में एंटीबायोटिक, बच्चों के सिरप, दर्द व बुखार, मधुमेह, रक्तचाप, हृदय रोग, एसिडिटी, एलर्जी, खांसी, फंगल संक्रमण, मिर्गी, किडनी तथा नसों के दर्द के उपचार में प्रयुक्त दवाएं शामिल हैं। इनमें इंजेक्शन, सिरप, सस्पेंशन, जेल और विटामिन उत्पाद भी शामिल हैं।


जांच के दौरान कुछ गंभीर खामियां भी सामने आई हैं। तीन इंजेक्शनों में पार्टिकुलेट मैटर (सूक्ष्म कण) पाए गए हैं। इनमें गंभीर संक्रमण के उपचार में इस्तेमाल होने वाला एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन, एसिड रिफ्लक्स के लिए प्रयुक्त रेबेप्राजोल सोडियम इंजेक्शन तथा जटिल बैक्टीरियल संक्रमण में उपयोग होने वाला मेरोपेनेम इंजेक्शन शामिल हैं।
अगस्त माह की जांच में हिमाचल प्रदेश में निर्मित तीन दवा बैचों को नकली भी घोषित किया गया है। कालाअंब में निर्मित लेवकॉन-एम के नमूने में मोंटेलुकास्ट तत्व नहीं पाया गया। इसी क्षेत्र में निर्मित रैबेप्राजोल सोडियम एवं डोमपेरिडोन कैप्सूल पहचान परीक्षण में फेल हुए, जबकि पांवटा साहिब में निर्मित डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड एवं मेफेनामिक एसिड टैबलेट में डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड की पहचान नहीं हो सकी।
राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि गुणवत्ता जांच में अधोमानक पाए गए दवा बैचों को बाजार से वापस मंगवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं तथा फील्ड स्टाफ निर्माण इकाइयों का निरीक्षण करेगा।
बीबीएन क्षेत्र में फेल हुई दवाओं में पैरासिटामोल, एमोक्सिसिलिन-क्लैवुलानेट, एमिकासिन, सेफ्यूरोक्साइम, सेफिक्सिम, ऑफ्लॉक्सासिन, प्रेगाबालिन, विल्डाग्लिप्टिन, रैबेप्राजोल, डोमपेरिडोन, इट्राकोनाजोल, क्लोपिडोग्रेल, रोसुवास्टेटिन और एस्पिरिन जैसी दवाएं शामिल हैं। कालाअंब में लाइनजोलिड, मेरोपेनेम, सिटाग्लिप्टिन, मेटफॉर्मिन, एसोमेप्राजोल, टेल्मिसार्टन, एम्लोडिपिन, एसिक्लोफेनाक और गर्भनिरोधक दवाएं भी गुणवत्ता जांच में फेल पाई गई हैं, जबकि पांवटा साहिब में कैल्शियम और विटामिन-डी उत्पादों के कुछ बैच अधोमानक पाए गए हैं।

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