सतही सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद पहाड़ी के नीचे सुरंग बनाने पर उठाए सवाल, 88 परिवार हुए थे विस्थापित; अगली सुनवाई 17 नवंबर को
एप्पल न्यूज़, शिमला
संजौली से भट्टाकुफर तक निर्माणाधीन ट्विन ट्यूब टनल के कारण मकानों को हो रहे नुकसान के मामले में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से सवाल किया है कि जब छकरेल, भट्टाकुफर और ढली से होकर सतही राजमार्ग बनाने के लिए पहले ही जमीन अधिगृहीत कर ली गई थी और करीब 600 करोड़ रुपये का मुआवजा भी वितरित किया जा चुका था, तो फिर मूल योजना में बदलाव कर घनी आबादी वाली पहाड़ी के नीचे सुरंग बनाने का निर्णय क्यों लिया गया?
न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने विनीत शर्मा एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एनएचएआई से यह भी जवाब मांगा है कि सतही राजमार्ग के लिए अधिगृहीत जमीन के मुआवजे पर खर्च किए गए लगभग 600 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि की भरपाई कौन करेगा और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से निर्माणाधीन सुरंग का काम तत्काल रोकने के निर्देश देने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-05 पर शिमला बाइपास की मूल योजना के तहत छकरेल, भट्टाकुफर और ढली से होकर सतही राजमार्ग बनाया जाना प्रस्तावित था। इसके लिए जमीन अधिगृहीत की गई थी और प्रभावित जमीन मालिकों एवं भवन मालिकों को करीब 600 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में बांटे गए थे। इस प्रक्रिया में लगभग 88 परिवार विस्थापित हुए और उनके मकान भी गिराए गए।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बाद में एनएचएआई ने मूल योजना में बदलाव करते हुए चलौंठी-संजौली से भट्टाकुफर तक ट्विन ट्यूब टनल बनाने का निर्णय लिया। अब इसी निर्णय को लेकर सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और परियोजना की अलाइनमेंट पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मकानों में दरारें, कई भवन असुरक्षित घोषित
अदालत के समक्ष पेश की गई तस्वीरों और दस्तावेजों के अनुसार, सुरंग का निर्माण ऐसी पहाड़ी के नीचे किया जा रहा है, जिसके ऊपर सैकड़ों मकान बने हुए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि निर्माण कार्य के दौरान कई भवनों में दरारें आ गई हैं। याचिकाकर्ताओं के मकानों को भी हाल ही में असुरक्षित घोषित किया गया है।
याचिका के साथ भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें पहाड़ी के नीचे सुरंग निर्माण को लेकर पहले ही परामर्श दिए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने पर याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं।
हाई कोर्ट ने एनएचएआई से पूरी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की गई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि एनएचएआई अदालत में अलाइनमेंट बदलने और 600 करोड़ रुपये के मुआवजे से जुड़े सवालों पर क्या जवाब देता है।



